रांची , नवम्बर 05 -- अखिल भारतीय किसान सभा की झारखंड प्रदेश कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को रांची के प्रेस क्लब में आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीर सागर ने की। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष भुवनेश्वर प्रसाद मेहता (पूर्व सांसद), प्रदेश महासचिव पुष्कर महतो सहित संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बैठक में किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें एमएसपी की गारंटी, कृषि ऋण माफी, खाद-बीज की बढ़ती कीमतें, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज की मांग और स्थानीय किसानों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल रहा। सभी वक्ताओं ने झारखंड के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए ठोस नीति की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीर सागर ने कहा कि झारखंड में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। अब तक करीब 45 लाख लोग भूमि अधिग्रहण के कारण विस्थापित हुए हैं। सबसे अधिक विस्थापन कोल इंडिया, डीवीसी, एचईसी और अन्य सरकारी परियोजनाओं के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के बावजूद किसानों की उपजाऊ जमीन आज भी औने-पौने दामों पर अधिग्रहित की जा रही है, जिससे आदिवासी और दलित समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

श्री सागर ने उदाहरण देते हुए कहा कि एनटीपीसी, कोल इंडिया और अन्य कंपनियों द्वारा किसानों को अपेक्षाकृत कम मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि बिहार जैसे राज्यों में अधिक मुआवजा मिलता है। उन्होंने गोड्डा, बड़कागांव और केरेडारी जैसे क्षेत्रों में कंपनियों और प्रशासन की मिलीभगत से किसानों के साथ हो रहे अन्याय का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बिना उचित जांच के 21 लाख हेक्टेयर गैरमजरूआ जमीन भूमि बैंक में डाल दी गई थी, जिसमें गरीब और आदिवासी किसानों की जमीनें शामिल हैं। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को रद्द करने, रैयती मान्यता देने, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की।

श्री सागर ने कहा कि झारखंड में बेरोजगारी और विस्थापन बढ़ने से सामाजिक असमानता गहराई है। स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं। उन्होंने घोषणा की कि किसान सभा आने वाले महीनों में राज्यभर में सदस्यता अभियान चलाएगी। मार्च तक जिला सम्मेलन, जून तक राज्य सम्मेलन और 23 दिसंबर को राज्यस्तरीय विशाल धरना आयोजित किया जाएगा, जिससे किसानों की आवाज पूरे राज्य में गूंजेगी।

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