जोधपुर , फरवरी 12 -- राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ किसनराव बागडे ने दीक्षांत को शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए चरण की शुरुआत बताते हुए विद्यार्थियों का आह्वान किया है कि वे अर्जित ज्ञान को कर्म में बदलते हुए राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें।
श्री बागडे गुरुवार को जोधपुर में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस समाज में बेटियां आगे बढ़ती हैं, वही समाज तेजी से विकास करता है-यह गर्व का विषय है कि आज स्वर्ण पदकों में बड़ी संख्या में बेटियां अग्रणी रही हैं। राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदियों से समग्र विकास, नैतिक मूल्यों और आत्मबोध पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि हमारे वेद, उपनिषद और गुरुकुल प्रणाली ने केवल विद्या नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की शिक्षा दी है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय करें। इससे विद्यार्थी केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक मंच पर भारत का नेतृत्व करें।
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