चंडीगढ़ , फरवरी 19 -- दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान एवं शिरोमणि अकाली दल दिल्ली इकाई के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने गुरुवार को कहा है कि सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने प्रेस क्लब जालंधर में पत्रकारों के सामने जो गंभीर आरोप लगाये हैं, उन्हें देखते हुए एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ये आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर ये आरोप बेबुनियाद हैं, तो एसजीपीसी को ज्ञानी रघबीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नही करना चाहिए।
श्री सरना ने कहा कि इस मामले में ज्ञानी सुलतान सिंह के नाम के इस्तेमाल के बारे भी विचार किया जाना चाहिए। इस मामले को श्री अकाल तख्त साहिब के संरक्षण में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अनुरोध है कि वे तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए पांचों सिंह साहिबान की बैठक बुलाकर आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि अगर इस मामले में किसी भी तरह की देरी की गयी तो संगत में काफी भ्रम पैदा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में दिये जा रहे बयान को पढ़ कर मीडिया के सामने रखा जा रहा है और वह यह पर्चा किसकी तरफ से पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ हो गया है कि ज्ञानी रघबीर सिंह जो पर्चा पढ़कर शिरोमणि कमेटी, शिरोमणि अकाली दल यां किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, यह एक बहुत बड़ी साजिश लगती है, जिसे कोई भी सिख बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह ने सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी के पद को दाग लगाने की कोशिश की है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। धार्मिक पद पर रहते हुए इस तरह के आरोप लगाने से अच्छा होता कि वह अपने पद के अधिकारों का इस्तेमाल करके कार्रवाई करते, क्योंकि यह एक राजनीति का हिस्सा लग रही, जिसके लिए ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा सोची समझी साजिश के तहत यह प्रेस काफ्रेंस की गयी है।
इसके साथ ही यह बुनियादी सवाल उठता है कि जिस समय से ज्ञानी रघबीर सिंह मुख्य ग्रंथी बने हैं, उसके बाद से अब तक इतने समय श्री हरिमंदिर साहिब में प्रतिदिन ही मर्यादा और नियम निभाये हैं। इसीलिए यह भी संगत को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
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