उदयपुर , फरवरी 20 -- राजस्थान में उदयपुर में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय 'ऋतु वसंत' उत्सव के पहले दिन पंडित चेतन जोशी के बांसुरी वादन और गौरी दिवाकर के कथक ने शास्त्रीय संगीत और नृत्य का ऐसा जादू बिखेरा कि क्लासिकल के श्रोता झूम उठे।

शिल्पग्राम में कार्यक्रम का शुभारंभ थिएटर विशेषज्ञ प्रो. सुरेश शर्मा, कलाविद प्रेम भंडारी, केंद्र के निदेशक फुरकान खान, कलाकार चेतन जोशी और गौरी दिवाकर ने दीप प्रज्वलित करके किया। केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने सभी का स्वागत किया।

इस संगीतमयी शाम की शुरुआत केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी के बांसुरी वादन से हुई। उन्होंने बांसुरी की धुन का आगाज राग रागेश्वरी में आलाप, जोड़ और झाला से किया। इसमें उन्होंने अति मंद्र सप्तक का भी अद्वितीय इस्तेमाल किया, जिसके लिए उनका नाम कई शोध प्रबंधों में भी आया है।

संक्षिप्त आलाप के बाद उन्होंने विलंबित रूपक ताल में एक गत रखी, जिसमें विभिन्न प्रकार की लयकारियों का अद्भुत समावेश दिखाई दिया। तीन ताल की मध्य लय की बंदिश "झननन बाजे मोरी पायलिया" और बाद में द्रुत लय की स्वरचित बंदिश बजाकर आपने श्रोताओं का मन मोह लिया। अंत में उन्होंने वसंत ऋतु की हृदय को छूने वाली धुन सुनाकर श्रोताओं के स्मृति पटल पर अमिट छाप छोड़ी।

पंडित जोशी के साथ तबले पर इंदौर के वरिष्ठ तबला वादक पंडित हितेंद्र दीक्षित ने सधी हुई संगत की।

पंडित जोशी को उनके शिष्य तथा पुत्र आंजनेय जोशी की बांसुरी पर सहयोग दिया। मात्र 14 वर्ष के आंजनेय ने इसी वर्ष बांसुरी वादन में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। इन्हें भारत सरकार से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी मिली है।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक से सुधी दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने नृत्य की शुरुआत सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना के करते हुए वसंत ऋतु का स्वागत किया। वहीं, उन्होंने पंडित बिन्दादीन महाराज द्वारा रचित एवं पंडित बिरजू महाराज द्वारा संगीत से शृंगारित लक्षण गीत (अष्टपदी) की प्रस्तुति में श्रीकृष्ण की नृत्य क्रियाओं के साथ कथक के विभिन्न अंगों को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

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