श्रीगंगानगर , अप्रैल 07 -- राजस्थान में जोधपुर डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध करते हुए जोधपुर डिस्कॉम संयुक्त संघर्ष समिति ने आज श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में सभी सहायक अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं तथा अधीक्षण अभियंताओं को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

समिति ने अपने ज्ञापन में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जब सरकार जनता के कर के पैसे से 6000 करोड़ रुपये की आरडीएसएस राशि बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च कर रही है तो उस तैयार बुनियादी ढांचे का लाभ निजी कंपनियों को देना एक बड़े आर्थिक अपराध के समान है। समिति ने साफ कहा कि निजी क्षेत्र केवल मुनाफे का साथी है आपदा का नहीं। तैयार बुनियादी ढांचे को निजी हाथों में सौंपना राजस्थान की विद्युत व्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।

समिति ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि जोधपुर डिस्कॉम का प्रस्तावित निजीकरण तुरंत निरस्त कर दिया जाए और 6000 करोड़ रुपये की यह राशि केवल सरकारी निगम के सुदृढ़ीकरण के लिए ही उपयोग की जाए। समिति का कहना है कि वर्तमान ठेका प्रथा और अत्यधिक आउटसोर्सिंग से कार्य की गुणवत्ता लगातार गिर रही है तथा भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। यदि संविदा प्रथा के स्थान पर पूर्व की भांति तकनीकी पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएं और योग्यता मानदंडों में शिथिलता प्रदान की जाए तो विभाग में वफादार और दक्ष कार्यबल तैयार हो सकता है,जो डिस्कॉम को घाटे से बाहर निकालने में सक्षम होगा।

ज्ञापन में उड़ीसा के निजीकरण मॉडल का उदाहरण देते हुए समिति ने चेतावनी दी कि चक्रवात जैसी भीषण आपदा के समय निजी कंपनियां अपना मुनाफा बचाकर भाग जाती हैं और विद्युत व्यवस्था बहाल करने का जिम्मा सरकारी कर्मचारियों पर ही आ जाता है। राजस्थान में कोटा, बीकानेर और भरतपुर के फ्रेंचाइजी मॉडल को पूरी तरह विफल बताते हुए समिति ने कहा कि इन शहरों में निजी कंपनियों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी भवनों का पूरा लाभ उठाया लेकिन 33 प्रतिशत स्टाफ को वापस डिस्कॉम पर थोप दिया।

समिति ने जोर देकर कहा कि डिस्कॉम का वित्तीय घाटा दोषपूर्ण नीतिगत निर्णयों और अत्यधिक ठेका प्रथा का परिणाम है। कर्मचारियों की निष्ठा से ही एटी एंड सी लॉस को 34 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत तक लाया गया है जिसके कारण जोधपुर डिस्कॉम वर्ष 2023-24 और 2024-25 में घाटे से बाहर निकलकर मुनाफे में रहा है। इसके बावजूद निजीकरण का प्रस्ताव कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

समिति ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि कर्मचारियों को विश्वास में लेकर प्रबंधन सुधार लागू किए जाएं और निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह रद्द कर दिया जाए। अगर इन मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो कर्मचारी संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

श्रीगंगानगर में चहल चौक पर स्थित सहायक अभियंता पंकज जोशी को आज यह ज्ञापन कनिष्ठ अभियंता विक्रम बिश्नोई और लेखा संघ के जिलाध्यक्ष सहदेव लेघा के नेतृत्व में सौंपा गया। हनुमानगढ़ जिले में भी इसी तरह सभी संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए।

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