नयी दिल्ली , मार्च 21 -- सरकार ने देश भर में आक्रामक विदेशी प्रजातियों से उत्पन्न लगातार बढ़ रहे पारिस्थितिक, सामाजिक और आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति का गठन पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के अनुसरण में पारिस्थितिकी, वानिकी, कृषि, मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान और जैव विविधता संरक्षण सहित विशेषज्ञता का एक व्यापक दायरे के मद्देनजर किया है जिसका मक़सद आक्रामक विदेशी प्रजातियों से निपटने के लिए समन्वित, विज्ञान-आधारित और समग्र सरकारी दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है।
समिति का कार्यकाल दो वर्ष होगा और इससे भारत की जैव विविधता की रक्षा करने, पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को बढ़ाने और राष्ट्रीय और वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं का समर्थन करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
जैव विविधता पर गठित इस समिति का अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएफएस और उत्तराखंड के पूर्व वन बल प्रमुख धनंजय मोहन को तथा सह अध्यक्ष केरल मत्स्य एवं महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) ए. बीजू कुमार को बनाया गया है। समिति में मंत्रालयों और अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रख्यात विशेषज्ञ भी शामिल हैं। जिनमें भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, आईसीएआर के पादप, मत्स्य और कीट आनुवंशिक संसाधन अनुसंधान ब्यूरो, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वन सर्वेक्षण और तमिलनाडु, ओडिशा, महाराष्ट्र और असम के राज्य वन विभागों के प्रतिनिधियों के साथ ही आईयूसीएन और अग्रणी अनुसंधान संस्थानों जैसे अंतरराष्ट्रीय और शैक्षणिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
प्राधिकरण ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में यथा संशोधित) के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस मुद्दे पर रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए बहु-विषयक समिति का गठन किया है। समिति को राज्यवार प्राप्त जानकारियों के आधार पर आक्रामक विदेशी प्रजातियों की एक समेकित राष्ट्रीय सूची तैयार करने, उच्च जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करने तथा विज्ञान-आधारित प्रबंधन रणनीतियों, पारिस्थितिक बहाली उपायों और उनकी रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्तर के दिशानिर्देशों की अनुशंसा करने का दायित्व सौंपा गया है।
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