नयी दिल्ली , फरवरी 12 -- सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना में तकनीकी समझौता हो चुका है और वाणिज्यिक विवरण को लेकर मामला अटका हुआ है।

जैतापुर परियोजना का निर्माण फ्रांस के सहयोग से किया जा रहा है। यह दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना होगी।

परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा के संदर्भ में परियोजना की प्रगति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जैतापुर परियोजना पर वार्ता जारी है। तकनीकी समझौता हो चुका है और वाणिज्यिक हिस्सों को लेकर कुछ अनसुलझे मुद्दे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने जहां परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में गोपनीयता को प्राथमिकता देते हुए उसे निजी क्षेत्र के लिए बंद रखा था, वहीं मौजूदा सरकार ने 'शांति' विधेयक के जरिये इसे निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन से अधिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे जिनके पास परमाणु ऊर्जा विभाग का कार्यभार है।

एक अन्य पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री सिंह ने बताया कि साल 2014 में देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता 4.780 गीगावाट थी जो अब बढ़कर 8.78 गीगावाट हो गयी है। 'शांति' विधेयक पारित होने से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विकास होगा और वित्त वर्ष 2031-32 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता तीन गुना होकर 22.38 गीगावाट पर पहुंच जायेगी। साल 2037 तक यह 47 गीगावाट, 2042 तक 67 गीगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट हो जायेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन के मामले में भारत आत्मनिर्भर है और पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर नहीं है।

परमाणु परियोजनाओं में राज्यों के हिस्से के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने बताया कि इस मामले में हिस्सा तय करने का फॉर्मूला पहले से चला आ रहा है। जिस राज्य में परियोजना होती है उसे उत्पादित बिजली में 50 प्रतिशत, पड़ोसी राज्यों को 35 प्रतिशत और केंद्रीय ग्रिड को 15 प्रतिशत मिलता है।

लिखित उत्तर में कहा गया है कि इस समय आठ परमाणु संयंत्र निर्माणाधीन हैं और 10 अन्य संयंत्र पूर्व परियोजना के चरण में हैं। सभी 18 संयंत्रों की कुल क्षमता 13,600 मेगावाट है।

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