नयी दिल्ली , दिसंबर 06 -- बाल अधिकार पर काम करने वाले प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठन 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' (जेआरसी) ने 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य में योगदान के लिए एक वर्ष में ऐसे जिलों के एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाने का एलान किया है, जहां इस समय बाल विवाह की प्रथा ज्यादा दिखायी देती है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बाल विवाह के खात्मे के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।

जेआरसी की शनिवार को यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस अभियान के लिए चिह्नित गांव देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 450 जिलों में फैले हैं। इनमें से 15 जिलों में बाल विवाह की दर 50 प्रतिशत से भी अधिक है, जबकि 45 जिले ऐसे हैं, जहां यह दर 40 प्रतिशत से ज्यादा है। इसके अलावा 95 जिले ऐसे हैं, जहां बाल विवाह की दर 30 प्रतिशत से ज्यादा है। कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत के आस-पास या इससे थोड़ा ज्यादा है और आशंका है कि इन जिलों में अगर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया तो स्थिति और खराब हो सकती है।

संगठन ने कहा है कि पूरे देश से गांवों की पहचान जिन प्रदेशों से की गयी है, उनमें से उत्तर प्रदेश में 41, मध्य प्रदेश में 39, बिहार और राजस्थान में 38-38 जिले और असम में 30 जिले हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 26, ओड़िशा के 25, झारखंड के 24, पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में संवेदनशील गांवों की पहचान की गयी है। इसके अलावा दिल्ली के सभी 11 जिलों को भी बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है।

केन्द्र सरकार के अभियान को पूर्ण समर्थन देते हुए जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, " हमने वादा किया है कि अगले एक साल में हम एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाएंगे, ताकि हर बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर एवं एक सुरक्षित भविष्य मिले। विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति में इन प्रयासों की गति काफी अहमियत रखती है। हम अगले तीन वर्षों में देश से बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और हमें विश्वास है कि यह संभव होगा।"उन्होंने कहा, " बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सामुदायिक समूहों, धार्मिक नेताओं, पंचायतों एवं नागरिकों की सबसे मुख्य भूमिका है। भारत सरकार का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुका है। यह बच्चों के खिलाफ एक प्रकार के अन्याय के खात्मे के हमारे सामूहिक प्रयासों एवं सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। पिछले साल एक लाख से भी ज्यादा बाल विवाह रोके एवं रुकवाये गये।"जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए देश भर के 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। अपने सहयोगी संगठनों के साथ करीबी तालमेल एवं समन्वय से काम करते हुए इस नेटवर्क ने पिछले एक साल में ही देश में एक लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाये हैं।

सरकार ने बाल विवाह की प्रथा को खत्म करने के लिए 100 दिन के देशव्यापी सघन अभियान के संबंध में राज्य सरकारों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने के निर्देश दिये हैं, ताकि लक्षित उद्देश्यों को हासिल किया जा सके। अभियान का समापन आठ मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा। तीन चरणों में चलने वाले इस अभियान का लक्ष्य भारत से 2029 से पहले बाल विवाह का खात्मा करना है। अभियान के पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता के प्रसार पर जोर दिया जाएगा। दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराये जाते हैं, वहां बाल विवाह की बुराइयों को बताया जायेगा। विवाह में सेवाएं देने वाले बैंक्वेट हाल, बैंड बाजा वाले, कैटरर, डेकोरेटर इत्यादि पर इस दौरान विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरे और आखिरी चरण में बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों एवं समुदाय स्तरीय भागीदारी और जिम्मेदारी को मजबूत किया जाएगा।

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