पटना , मार्च 07 -- बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) ने पिरामल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन लीडरशिप के साथ "जीविका-दीदी की आवाज़ केंद्र" की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
यह केंद्र चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना में स्थापित किया जाएगा, जो जीविका-दीदी अधिकार केंद्र के लिए एक सपोर्ट-कम-कमांड सेंटर (सहयोग-सह-नियंत्रण कक्ष) के रूप में कार्य करेगा।इस केंद्र का संचालन प्रशिक्षित करूणा और संविधान फेलोज़ द्वारा किया जाएगा। ये फेलोज़ राज्य भर में स्थित दीदी अधिकार केंद्र से फोन कॉल से आने वाली शिकायतों को सुनेंगे, उन्हें व्यवस्थित रूप से दर्ज करेंगे, संबंधित संसाधन व्यक्तियों तक पहुंचाएंगे तथा उनके समाधान की नियमित निगरानी भी करेंगे। साथ ही, इन मामलों के समाधान की नियमित निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक शिकायत या समस्या का समयबद्ध और उचित समाधान हो सके।
यह पहल जीविका-दीदी अधिकार केंद्रों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों को समय पर मार्गदर्शन मिलेगा तथा मामलों की ट्रैकिंग के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
"जीविका-दीदी की आवाज़ केंद्र" का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण महिलाओं की आवाज़ सुनी जाए और उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान उपलब्ध हो। यह केंद्र महिलाओं को यह भरोसा भी देगा कि उनकी समस्याएं महत्वपूर्ण हैं और उनके समाधान के लिए एक मजबूत राज्य स्तरीय सहायता प्रणाली मौजूद है।
जीविका-दीदी की आवाज़ केंद्र का संचालन न्याय, चाणक्य राष्ट्रीय विधि और पीरामल फाउंडेशन विश्वविद्यालय के साथ समन्वय में किया जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस सहयोग के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जमीनी स्तर पर न्याय तक पहुंच को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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