रांची , अप्रैल 08 -- झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी समय में केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ शरीर और संतुलित मन भी उतने ही आवश्यक हैं।

श्री गंगवार ने आज मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर परिसर स्थित राँची विश्वविद्यालय, राँची द्वारा स्थापित 'हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर' के उद्घाटन समारोह में कहा कि यह केंद्र विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मियों के समग्र स्वास्थ्य-शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने इस केंद्र की स्थापना के लिए राँची विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।

राज्यपाल श्री गंगवार ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संतुलन बनाए रखें, सकारात्मक सोच अपनाएँ तथा नियमित योग, ध्यान और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। उन्होंने कहा कि एकाग्रता, अनुशासन एवं आत्मविश्वास सफलता के प्रमुख आधार हैं तथा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चुनौतियों का सामना करते हुए उन्हें अवसर में बदला जा सकता है।

श्री गंगवार ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि तनाव एवं चिंता जैसी स्थितियों में समय पर परामर्श लेना आवश्यक है तथा समाज में संवेदनशीलता और संवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय को आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि रिम्स एवं सीआईपी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से यह केंद्र प्रभावी रूप से कार्य करेगा, जिससे विश्वविद्यालय समुदाय को विशेषज्ञ सेवाओं का लाभ प्राप्त होगा।

श्री गंगवार ने कहा कि देश "विकसित भारत" के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है तथा फिट इंडिया और आयुष्मान भारत जैसे प्रयास युवाओं के समग्र विकास को सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने इस पहल को शिक्षा एवं स्वास्थ्य के समन्वित दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगा तथा स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर विषय बनकर उभर रहा है और समाज में अनेक लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस केंद्र का सदुपयोग करना चाहिए तथा मनोचिकित्सक या परामर्शदाता के पास जाने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होंगे, तो राष्ट्र के विकास में अपेक्षित भूमिका निभाना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश में आत्महत्या के मामले चिंताजनक हैं, जिनमें युवाओं की संख्या अधिक है, इसलिए समय पर मार्गदर्शन एवं परामर्श अत्यंत आवश्यक है।

श्री कुलकर्णी ने कहा कि यह आवश्यक है कि 'हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर' सुचारू रूप से संचालित होता रहे तथा यहाँ नियमित रूप से काउंसलर उपलब्ध रहें। उन्होंने टेली-काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी नवाचार एवं प्रौद्योगिकी की सदी है, ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं में भी तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से व्यापक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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