चंडीगढ़ , जनवरी 07 -- हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने बुधवार को कहा कि विकसित भारत जीरामजी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका की गारंटी है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जिससे गांवों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। वह आज पलवल स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री गोयल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान मनरेगा भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई थी, जबकि जीरामजी योजना पूरी तरह पारदर्शी और ग्रामीण हितैषी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया है। मजदूरी भुगतान में देरी होने पर लाभार्थियों को अतिरिक्त मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही बेरोजगारी भत्ते के नियमों को पहले से अधिक सख्त और प्रभावी बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि अब गांवों के विकास की योजना दिल्ली नहीं, बल्कि ग्राम सभा और ग्राम पंचायतें स्वयं तैयार करेंगी। योजना के तहत कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे। जॉब कार्ड जारी करने, परिवारों के पंजीकरण और काम के आवेदन जैसी जिम्मेदारियां पंचायतों को सौंपी गई हैं।

मंत्री ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में कौशल केंद्र और हाट विकसित किए जाएंगे। बुवाई और कटाई के चरम मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकार साल में अधिकतम 60 दिन तक योजना कार्य स्थगित कर सकेगी। जमीनी कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक खर्च को छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया गया है।

भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की गई है और मोबाइल ऐप व सैटेलाइट के माध्यम से कार्यों की निगरानी होगी। ग्रामीणों को सोशल ऑडिट का अधिकार भी दिया गया है।

जिला अध्यक्ष विपिन बैंसला ने कहा कि जीरामजी योजना का उद्देश्य भ्रष्टाचार मुक्त ग्राम पंचायत, सुशासन और जनभागीदारी के जरिए आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है। प्रेसवार्ता में महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष उषा प्रियदर्शी, एडीसी सुनीता, डीपीओ उपमा अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित