गांधीनगर , दिसंबर 06 -- गेट्स फाउंडेशन गुजरात सरकार की ओर से संचालित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (जीबीयू) की रिसर्च टीम को महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले भारी रक्तस्राव पर रिसर्च करने के लिए करीब 1.3 करोड़ रुपये की सहायता देगा।

जीबीयू की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रोहिणी नायर ने शनिवार को यहां जारी बयान में बताया कि गेट्स फाउंडेशन की फंडिंग के अंतर्गत उनके नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम 'हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग- एचएमबी', महिलाओं के पीरियड्स के दौरान होने वाले भारी रक्तस्राव के लिए, आरएनए आधारित, राईबोन्यूक्लिक एसिड पर आधारित डायग्नोस्टिक एवं उपचार की खातिर संसाधन विकसित करने के लिए कार्य करेगी। ये संसाधन सस्ते, स्केलेबल यानी विस्तार करने में सक्षम और कम आक्रामक होंगे।

विशेषकर, दूरदराज के इलाकों की महिलाओं के लिए जल्दी निदान, व्यक्तिगत उपचार और मेंस्ट्रुअल हेल्थ मैनेजमेंट में सुधार लाने के उद्देश्य के साथ इस प्रोजेक्ट को 'गेट्स फाउंडेशन ग्रैंड चैलेंजेस सपोर्ट' के तहत स्वीकृत किया गया है। गेट्स फाउंडेशन ने इसके लिए लगभग 1.3 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है।

डॉ. रोहिणी नायर ने इस विषय में बताया कि गेट्स फाउंडेशन ने फरवरी, 2025 में 'ग्रैंड चैलेंजेस' फंडिंग कॉल शुरू किया था, जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्यसे संबंधित गंभीर, लेकिन अक्सर उपेक्षा का शिकार रहने वाली समस्या हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग के निवारण के लिए अभिनव दृष्टिकोण आमंत्रित किये गये थे। फाउंडेशन मूल्यांकन के लिए दो चरणों की प्रक्रिया का पालन करता है, जिसकी शुरुआत कंसेप्ट नोट या लेटर ऑफ इंक्वायरी (एलओआई) से होती है।

इसके बाद शॉर्टलिस्ट किये गये उम्मीदवारों से संपूर्ण प्रपोजल मंगाया जाता है, ताकि वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और वैज्ञानिक सावधानी या सटीकता बनी रहे। भारी मासिक धर्म रक्तस्राव की समस्या के निवारण और इस संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए जीबीयू की ओर से महिलाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि यह अन्य महिलाओं के लिए मददगार साबित हो सके।

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