नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- साख निर्धारण एजेंसियों और बैंकों ने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने के अनुमान को अपेक्षा के अनुरूप बताते हुए कहा कि अगले वित्त वर्ष में भी इसमें मजबूती बनी रहेगी।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अग्रिम अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि स्थिर मूल्य आधारित रियल जीडीपी की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत और वर्तमान मूल्य आधारित नॉमिनल जीडीपी की वृद्धि दर आठ फीसदी रहने की संभावना है। इसमें सेवा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि देखी गयी है। इसके साथ ही पूंजी निर्माण, सरकारी खपत और निजी क्षेत्र की खपत में भी मजबूत बढ़ोतरी का अनुमान है।
साख निर्धारण और बाजार अध्ययन एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि जीडीपी की 7.4 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर वित्त वर्ष के आरंभ में जताये गये अनुमानों से 100 आधार अंक (एक प्रतिशत) अधिक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मूल्य आधारित नॉमिनल जीडीपी की आठ प्रतिशत की वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत के बजट अनुमान से काफी कम है। वास्तविक और नॉमिनल जीडीपी में महज 60 आधार अंकों का अंतर 2011-12 के बाद सबसे कम है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। इसे नरम मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों, कॉरपोरेट जगत की मजबूत बैलेंसशीट, सामान्य से ज्यादा मानसून और सस्ते कच्चे तेल का लाभ मिल रहा है। श्री जोशी ने अनुमान जताया कि अगले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर कम होगी और नॉमिनल जीडीपी की बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अग्रिम अनुमान दिसंबर तक के आंकड़ों के आधार पर जारी किया गया है, इसलिए अंतिम आंकड़े अलग हो सकते हैं। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि जीडीपी वृद्धि का यह अनुमान अपेक्षा के अनुरूप है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में नयी पीढ़ी के सुधार, कम आयकर का बोझ, मुद्रास्फीति का कम स्तर, रेपो दर में कटौती और मजबूत ग्रामीण मांग अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने ऊंची वैश्विक अनिश्चितता के प्रति चेताया और कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क का असर निर्यात तथा पूंजी प्रवाह पर हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जतायी कि नॉमिनल जीडीपी में आठ प्रतिशत की सुस्त वृद्धि के बावजूद सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि दर से रिजर्व बैंक के रेपो दर में और कटौती की गुंजाइश बनती है।
एसबीआई रिसर्च के इकोरैप की रिपोर्ट में विश्वास व्यक्त किया गया है कि जीडीपी की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि इस साल आधार वर्ष 2022-23 करने के बाद ये सभी आंकड़े बदल जायेंगे। इसमें कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष की गिरावट के बाद पूंजी निर्माण ने गति पकड़ी है और यह 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। यह निवेश मांग में बढ़ोतरी को दिखाता है। उसने भी राजकोषीय घाटे के लक्षित सीमा के भीतर रहने का विश्वास व्यक्त किया है।
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