, Dec. 10 -- देहरादून,10 दिसंबर (यूनीवार्ता) देहरादून में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके दून बासमती चावल को जिला प्रशासन के प्रयासों से फिर से जीवित किया गया है।
देहरादून जिला प्रशासन के मुताबिक सहसपुर और विकास नगर के किसानों ने बासमती की टाइप 3 खेती को विस्तार दिया है, और नई पहचान के साथ अन्य किसानों को भी आगामी फसल के लिए प्रोत्साहित भी किया है।
किसानों के प्रयासों से इस पारंपरिक फसल को नई दिशा मिल रही है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी यह प्रेरणा स्रोत बन रहा है।
जिला प्रशासन की तरफ से सहसपुर और विकास नगर के किसानों व समूह की महिलाओं को बासमती धान की अच्छी उपज के लिए ग्राम उत्थान, कृषि विभाग की ओर से ट्रेनिंग, तकनीकी मार्गदर्शन व बाजार तक पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
देहरादून के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने विकास भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि वर्तमान समय में देहरादून का बासमती धान विलुप्ति के कगार पर था, लेकिन इस प्रजाति को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ जिला प्रशासन ने पहल की है।
देहरादून बासमती को दोबारा परंपरागत तरीके से पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन ने एक ठोस कार्य योजना बनाई है।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले प्रशासन ने परंपरागत तरीके से खेती करने वाले किसानों को चयनित किया गया। जिसके बाद इन सभी किसानों को क्लाइमेट चेंज के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि देहरादून बासमती धान उगाने की दिशा में काम करने वाले किसानों को कृषि विभाग की ओर से सर्टिफिकेट भी प्रदान किए जाएंगे। जिससे दून बासमती धान को सर्टिफाइड किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इन सब प्रयासों से हर स्तर पर बासमती के उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आया है, किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।
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