नयी दिल्ली , दिसंबर 15 -- केंद्र सरकार देश की जियोस्पेशियल क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयास में बुधवार को नयी दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 'जियोस्पेशियल मिशन: विकसित भारत का एक सहायक' शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन करेगी।

एक आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, भारतीय सर्वेक्षण विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह करेंगे।

मंत्रालय ने कहा कि कार्यशाला देश के जियोडेटिक रेफरेंस सिस्टम को अपग्रेड करने, जियोस्पेशियल डेटा और मैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और जियोस्पेशियल फ्रेमवर्क में मानकों को एक समान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इन उपायों का उद्देश्य राष्ट्रीय मानचित्रों की सटीकता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि योजना और शासन के लिए उपयोग किया जाने वाला स्थान-आधारित डेटा विश्वसनीय और अद्यतन हो।

बयान में कहा गया है कि विशेषज्ञ जियोस्पेशियल क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी विकास खासकर डेटा अधिग्रहण, प्रोसेसिंग, एनालिटिक्स और उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग जैसे क्षेत्रों के साथ तालमेल बिठाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे।

भारत ने केंद्रीय बजट 2025-26 में 100 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय जियोस्पेशियल मिशन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण, शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास सहित अन्य उद्देश्यों के लिए एक मूलभूत स्थान-आधारित बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

यह मिशन चार दशकों से किए गए जमीनी काम पर आधारित है। वर्ष1982 में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने जियोस्पेशियल अनुसंधान को बढ़ावा देने और राज्य और जिला स्तर पर निर्णय-समर्थन उपकरण प्रदान करने के लिए प्राकृतिक संसाधन डेटा प्रबंधन प्रणाली (एनआरडीएमएस) लॉन्च की थी। यह पहल बाद में राष्ट्रीय जियोस्पेशियल कार्यक्रम (एनजीपी) में विकसित हुई।

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