टोक्यो , दिसंबर 06 -- विवाह से पहले के उपनाम को बनाए रखने की अनुमति देने की जापान की पहल ने एक गहरे सांस्कृतिक विवाद को हवा दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए जापान की सरकार एक नए बुनियादी कार्यक्रम में जन्म के समय मिले उपनामों को मान्यता देने के लिए कानून लाने का विचार कर रही है। इस योजना को इस महीने के अंत में कैबिनेट से अनुमोदन मिलने की उम्मीद है।
सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी अगले साल के संसदीय सत्र के दौरान इस संबंध में विधेयक प्रस्तुत करने की उम्मीद कर रही है।
दरअसल, आधुनिक कानूनों के शादी के बाद औरत को अपने पति का उपनाम अपनाना पड़ता है। मेइजी काल (1868-1912) में जापान ने इस आधुनिक परिवार व्यवस्था को अपनाया, ताकि परिवार की एकता बनी रहे और वंश के साथ-साथ परंपरा का निर्वाह होता रहे।
इस परंपरा और कानून के कारण शादी के बाद लगभग सभी महिलाओं को अपना उपनाम बदलकर पति के नाम पर रखना पड़ता है, लेकिन इस परंपरा को कई महिलाएं अपने लिए बाधक मानती हैं। महिलाओं का कहना है कि इसके कारण उन्हें बचपन से मिले पहचान को खोना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, वक्त के साथ महिलाओं ने जैसे-जैसे आर्थिक क्षेत्र में कदम रखा है, उन्हें अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अपनी डिग्रियों और प्रपत्रों में भी कानूनी रूप से नाम बदलवाना पड़ता है, जो परेशानी का कारण है।
जापान का यह कानून इन दो विचारों और उनके समर्थकों के बीच दूरी को पाटने की कोशिश करता है। अधिकारियों का कहना है कि यह विवाहित लोगों के सामने आने वाली व्यावहारिक असुविधाओं को दूर करेगा, जबकि पारंपरिक पारिवारिक नाम को महत्व देने वालों को इसे बनाए रखने की अनुमति भी देगा।
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