नयी दिल्ली , नवंबर 03 -- सरकार ने बुधवार को बताया कि जापान में फुकुशिमा की दुर्घटना और युक्रेन-रूस युद्ध के चलते भारत में कुछ परमाणु बिजली घरों के काम में देरी हुई है।
विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी एवं परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि राजस्थान परमाणु बिजली परियोजना, आरएपीपी-8 (700 मेगावाट) का काम पूरा होने और इसके चालू होने में देरी हो गई है। इसका कारण मुख्य रूप से जापान में फुकुशिमा दुर्घटना के गहन विश्लेषण के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर डिज़ाइन की समीक्षा और नए अपग्रेड को शामिल करना है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना, केकेएनपीपी-3 और 4 (2 गुणा 1000 मेगावाट) के काम में रूस-यूक्रेन के बीच वर्तमान विवाद और ज़िला प्रशासन द्वारा खदान का काम रोकने के कारण रॉक प्रोडक्ट्स की अनुपलब्धता के कारण देरी हुई है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ठेकेदारों की पैसे की तंगी और कोविड 19 महामारी के असर से भी परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हुई है।
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (बीएचएवीआईएनआई) द्वारा शुरू किए जा रहे 500 मेगावाट क्षमता के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के निर्माण और चालू करने के चरण में भी देरी हुई है। इसका एक कारण यह भी है कि यह अपनी तरह का पहला रिएक्टर है। उन्होंने बताया कि इस देरी का कारण बनी प्रौद्योगिकीय चुनौतियों को व्यवस्थित तरीके से दूर कर लिया गया है तथा इस रिएक्टर को पहली बार सक्रिय करने (क्रिटिकैलट बनाने) के लिए परमणु ईंधन भरने का काम चल रहा है और पूरी परियोजना का 97.90 प्रतिशत काम हो चुका है।
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