लखनऊ , अक्टूबर 30 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जातीय रैलियों पर रोक के मामले में राज्य सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा कि जातीय रैलियों को रोकने समेत अपराधिक मामलों में लोगों की जाति न लिखे जाने का आदेश जारी किया गया है।
इस मामले में कोर्ट के पहले के आदेश के तहत केंद्र और राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामे दाखिल किए हैं। याची अधिवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि जाति आधारित रैलियों को रोकने और अपराधिक मामलों में लोगों की जाति न लिखे जाने का आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत पुलिस महानिदेशक ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है। मामले में केंद्र सरकार ने भी अपना जवाब दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र के जवाब पर याची को प्रतिउत्तर दाखिल करने का समय देकर मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को नियत की है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। पहले, इस मामले में कोर्ट ने पक्षकारों केंद्र व राज्य सरकार समेत केंद्रीय निर्वाचन आयोग एवं चार राजनीतिक दलों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जवाब मांगा था।
कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से पूछा था कि दोनों सरकारें जातीय रैलियां रोकने को क्या उपाय कर रही हैं। साथ ही कोर्ट ने याची को भी पिछले 10 साल में राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित की गई जातीय रैलियों का ब्योरा नए हलफनामे पर दाखिल करने को कहा था। मामले की पिछली सुनवाई के समय कोर्ट को बताया गया था कि जातीय रैलियां रोकने को बीते 21 सितंबर को राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है।
इस पर कोर्ट ने कहा था कि यह समझ से परे है कि अगर यह आदेश जारी हुआ तो संबंधित अफसर ने अदालत के पहले के आदेश के तहत इसका हलफनामा पेश क्यों नहीं किया। कोर्ट ने राज्य को इसका हलफनामा दाखिल करने को सिर्फ तीन दिन का समय देकर चेताया कि इसमें नाकाम रहने पर प्रमुख सचिव स्तर के अफसर को सपष्टीकरण देने को पेश होना होगा। उधर, केंद्र के वकील ने भी जवाबी हलफनामा दाखिल करने को समय मांगा था।
याचिकाकर्ता ने यह याचिका वर्ष 2013 में दायर की थी। उसका कहना था कि उत्तर प्रदेश में जातियों पर आधारित राजनीतिक रैलियों की बाढ़ आ गयी है। सियासी दल ब्राहमण रैली, क्षत्रिय रैली, वैश्य सम्मेलन आदि नाम देकर अंधाधुंध जातीय रैलियां कर रहे हैं, जिन पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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