नयी दिल्ली , दिसंबर 11 -- पिछले सप्ताह बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करने वाली विमान सेवा कंपनी इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीटर एलबर्स शुक्रवार को मामले की जांच के लिए गठित समिति के समक्ष पेश होंगे।

सरकार ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्राह्मणे की अध्यक्षता में मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था।

इंडिगो ने गुरुवार को शेयर बाजार को बताया, "कंपनी के सीईओ पीटर एलबर्स को 12 दिसंबर 2025 को उड़ानों में व्यवधान की जांच कर रही डीजीसीए की अधिकारियों की समिति से समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है।"इससे पहले डीजीसीए ने श्री एलबर्स को एक समीक्षा बैठक के लिए गुरुवार को उसके कार्यालय में तलब किया था।

जांच समिति के अन्य सदस्य डीजीसीए के उप महानिदेशक अमित गुप्ता, वरिष्ठ फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर कैप्टन कपिल मांगलिक और फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर कैप्टन लोकेश रामपाल हैं। इसका गठन पांच दिसंबर को किया गया था और इसे 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

समिति बड़े पैमाने पर इंडिगो की उड़ानों में व्यवधान के कारणों की पहचान करेगी। वह मानव बल के नियोजन में कमी, रोस्टरिंग प्रणाली में फ्लक्चुएशन और एफडीटीएल (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) को लागू करने के लिए कंपनी की तैयारियों की भी जांच करेगी। वह यह भी देखेगी कि एफडीटीएल के प्रावधानों को एयरलाइन ने कहां तक लागू किया। वह नियोजन में विफलता के लिए उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी का भी आंकलन करेगी। साथ ही यह भी देखेगी कि इंडिगो को नये नियमों दी गयी एक बार की छूट के बाद उसने संकट को हल करने के लिए क्या उपाय किये हैं।

उल्लेखनीय है कि इंडिगो ने तीन दिसंबर से बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द की हैं जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे बुरा हाल पांच दिसंबर को रहा जब उसने मात्र 700 उड़ानों का परिचालन किया और उसकी 1,500 से अधिक उड़ानें रद्द रहीं।

सरकार ने इंडिगो को विंटर शिड्यूल की उसकी उड़ानों में 10 प्रतिशत की कटौती का आदेश भी दिया है।

इंडिगो से चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता और श्री एलबर्स अलग-अलग वीडियो संदेश जारी कर कह चुके हैं कि 'इंडिगो संकट' जानबूझकर पैदा नहीं किया गया था। उन्होंने कहा है कि यह कई कारणों के सम्मिलित प्रभाव का नतीजा था जिसमें रोस्टरिंग और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के अलावा तकनीकी और मौसम संबंधी कारण भी शामिल हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित