नयी दिल्ली , दिसंबर 03 -- जल प्रदूषण नहीं करने वाली औद्योगिकी इकाइयों के लिये कारोबार में आसानी के प्रावधानों वाले जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम को मणिपुर राज्य में लागू करने के सांविधिक संकल्प को बुधवार को राज्य सभा ने ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।

सरकार की ओर से प्रस्तुत इस संकल्प पर राजनीतिक नोंक-झोंक और सांविधिक सवाल-जवाब से भरी चर्चा और उस पर पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के जवाब के बाद सदन ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया। श्री यादव ने विधेयक को मोदी सरकार के जीवनयापन तथा कारोबार करने में आसानी की नीतियों के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि पुराने अधिनियम में सिविल प्रकृति के कई उल्लंघनों में आपराधिक सजा के प्रावधान थे जो उचित नहीं कहे जा सकते थे। ऐसे मामलों में अब केवल अर्थ दंड का प्रावधान है।

जल प्रदूषण के मामलों में जेल की सजा के प्रावधान को खत्म करने की आलोचना के जवाब में श्री यादव ने कहा कि बिना समुचित अनुमति के परिचालन करने वाली इकाइयों के खिलाफ सजा के प्रावधान बरकरार रखे गये हैं। उन्होंने कहा कि संशोधन अधिनियम में निर्णायक प्राधिकरण के प्रावधान के बावजूद न्यायालय में चुनौती का रास्ता खुला रखा गया है तथा अर्थ दंड से प्राप्त 75 प्रतिशत राशि राज्यों को दिये जाने का प्रावधान है।

पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि यह संशोधन राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की विधान सभाओं के संकल्प के बाद लाया गया था। अब पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों ने इन संशोधनों को अपने यहां लागू कर लिया है। राष्ट्रपति शासन के दौर से गुजर रहे मणिपुर के प्रशासन के अनुरोध पर इस संकल्प को संसद में पारित कराया जा रहा है।

श्री यादव ने चर्चा में भाग लेने वाले कुल 24 सदस्यों का धन्यवाद करते हुए कहा कि न्यूनतम शासन , अधिकतम सुशासन तथा जिंदगी में आसानी के लिए जन विश्वास बढ़ाने के सिद्धांत के आधार पर यह विधेयक लाया गया। उन्होंने कहा , ' जनविश्वास का अर्थ है कि लोग अपने से कानून चलायें ओर अदालतों के चक्कर न लगाने पड़े। छोटी छोटी व्यापारिक जिम्मेदारियों पर जेल का प्रावधान ठीक नहीं है। पिछले कानून में सिविल जवाबदेही के लिए आपराधिक प्रावधान बना दिये गये थे।" नये संशोधन में संयुक्त सचिव के स्तर के अधिकारी के अंतर्गत एडजुडिकेटिंग अथारिटी (निर्णायक प्राधिकरण ) का प्रावधान है लेकिन न्याय के दरवाजे भी खुले रखे गये हैं।

उन्होंने विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 252 का मुद्दा उठाये जाने को भी खारिज किया जिसमें राज्य सूची के विषयों में केंद्र को दो या दो से अधिक राज्यों के बारे में कानून बनाने का प्रावधान है। पर इसके साथ शर्त है कि वे राज्य इसके लिए सहमत हों।

पर्यावरण मंत्री ने चर्चा के दौरान विपक्ष की राजनीतिक टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, 'चुनाव के मामले में जो चिंता बंगाल को लेकर है वह मणिपुर को लेकर नहीं है। हम चाहते हैं कि पूरे देश में चुनाव शांति से हो।'राघव चढ्ढा के भाषण के जवाब में व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने कहा कि वह पंजाब राज्य की सच्चाई उजागर कर रहे थे । पंजाब में जमीन के प्रदूषण की समस्या सबसे बड़ी समस्या है वह सभी के लिये चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि इस संशोधन में एक राज्य में परिचालन की सहमति यानी कंसेट टू आपरेट (सीटीओ) की सुविधा से इकाइयों को दूसरे राज्यों में कारोबार करने में आसानी होगी।

श्री यादव ने यह भी कहा कि पराली जलाने के मामलों में 2016 की तुलना में 90 प्रतिशत की कमी आयी है तथा एक्यूआई के 400 आंकड़ों वाले दिनों की संख्या पहले की तुलना में कम हुयी है।

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