भोपाल , नवम्बर 11 -- मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में मंगलवार को जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें मध्यप्रदेश को दो प्रमुख श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ है। खरगोन जिले को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला, जबकि खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर ने सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आगामी 18 नवम्बर को पुरस्कार प्रदान करेंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कृत जिलों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के लिए गर्व की बात है और यह जनसहभागिता आधारित जल संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। "जल संचय-जन भागीदारी" पहल के अंतर्गत भी मध्यप्रदेश को अग्रणी स्थान मिला है। वेस्टर्न जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ को प्राप्त हुआ है। वहीं श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना जिला प्रथम स्थान पर रहा। जिलों की श्रेणी तीन में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगोन का चयन हुआ है।

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2024 के लिए इन पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस वर्ष कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) का चयन किया गया है। ये पुरस्कार दस श्रेणियों में दिए जा रहे हैं- सर्वश्रेष्ठ राज्य, जिला, ग्राम पंचायत, शहरी स्थानीय निकाय, स्कूल या कॉलेज, उद्योग, जल उपयोक्ता संघ, संस्था, सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु व्यक्ति।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय "जल समृद्ध भारत" के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए देशभर में जनजागरण अभियान चला रहा है। वर्ष 2018 से प्रारंभ राष्ट्रीय जल पुरस्कार योजना का उद्देश्य व्यक्तियों व संस्थाओं द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण के प्रयासों को पहचान देना और जल संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।

"जल संचय-जन भागीदारी" पहल के अंतर्गत जिलों को न्यूनतम 10,000 भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।

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