लखनऊ , नवंबर 11 -- योगी सरकार के नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन की देखरेख में जल संरक्षण/संचयन के लिए हुए कार्यों की बदौलत मीरजापुर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसी का परिणाम है कि जलशक्ति मंत्रालय द्वारा घोषित पुरस्कारों में मीरजापुर को उत्तर जोन में सर्वश्रेष्ठ जनपद घोषित किया गया है।

मीरजापुर में 12 विकासखंड और 809 ग्राम पंचायतें हैं। यहां जलस्तर में गिरावट और सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। गर्मियों में कई इलाकों में हैंडपम्प और कुएं सूख जाते थे। कम वर्षा के कारण भूजल स्तर गिरने से सिंचाई संकट गहरा जाता था। इससे निजात दिलाने और वर्षा जल संचयन के लिए 24 फरवरी 2024 से विशेष अभियान का शुभारम्भ किया गया, फिर इसके लिए विभिन्न प्रकार के स्ट्रक्चर तैयार किए गए।

मीरजापुर प्रशासन के मुताबिक यहां लोहंदी नदी का जीर्णोद्धार कराया गया। 15 किमी लंबी यह नदी बरकछा खुर्द (अटारी पुल) से निकलकर राजापुर में गंगा नदी से मिलती है। यह 11 ग्राम पंचायतों से होते हुए गुजरती है। इसके 10.63 किमी क्षेत्र में मनरेगा के तहत कार्य कराए गए, शेष कार्य जनसहभागिता से कराए गए। नदी पुनर्जीवन के लिए सिल्ट सफाई और उससे जुड़े नालों का जीर्णोद्धार हुआ। हाफ मून बंडिंग, पौधरोपण और ट्रेंच निर्माण नदी किनारे हुआ। अतिक्रमण हटाकर नदी को मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किया गया। तालाबों की सिल्ट सफाई, खेत तालाब, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पिट आदि का निर्माण कराया गया। इससे जल संरक्षण में वृद्धि हुई और ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।

हॉफ मून बंडिंग वर्षा जल संचयन की तकनीक है। यह न केवल वर्षा जल संचयन में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि अनुपजाऊ भूमि को उपजाऊ बनाने में भी उपयोगी है। मनरेगा योजनान्तर्गत जनपद में जल सरंक्षण के क्षेत्र में यह अभिनव प्रयास है। इसमें लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य किया गया। एक हेक्टेयर में 1200 संरचनाएं संभव हुईं तो 14 लाख घनमीटर जल का पुनर्भरण हुआ।

जल संरक्षण की दिशा में अनेक कार्य भी कराए गए। 196 तालाबों की सिल्ट सफाई हुई। 1031 रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार हुए। 164 खेत तालाबों, 157 बंधियों का निर्माण/मरम्मत हुई। नालों की सिल्ट सफाई के 500 कार्य हुए। सोकपिट/रिचार्ज पिट के 5444, ट्रेच निर्माण के 590 कार्य हुए। चेकडैम निर्माण के भी 17 कार्य कराए गए। भूगर्भ जल विभाग द्वारा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान एवं जी०आई०सी० में बड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराया गया। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देते हुए एक वर्ष में कुल 3894 हेक्टेयर में स्प्रिंकलर सिंचाई जोड़ी गई।

मीरजापुर में जल संरक्षण कार्यों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे। पहले सूख चुके हैंडपंपों में अब पानी आ रहा है। इस वर्ष हुई वर्षा से जलाशयों में भरपूर जल संचय हुआ। इससे सिंचाई, मत्स्य पालन और पशु-पक्षियों के लिए पानी की जरूरतें पूरी हो रही हैं। वहीं किसानों की आय बढ़ेगी और सूखे की समस्या से राहत मिलेगी।

जिले के छह विकास खंडों में भूजल स्तर में औसतन एक मीटर की बढ़ोतरी हुई है। लोहंदी नदी के किनारे चितपुर, गोपालपुर आदि गाँवों में भूजल स्तर 2.27 मीटर तक बढ़ा, जिससे सूखे कुएँ और बोरवेल पुनर्जीवित हुए। सभी विकास खण्ड में भी जल उपलब्धता में सुधार हुआ। कार्यों का ही परिणाम है कि सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रहा छानबे ब्लॉक अब सेफ श्रेणी में आ गया है। कोन ब्लॉक में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 3894 हेक्टेयर में माइक्रो-इरिगेशन (स्प्रिंकलरड्रिप) लगाकर जल की बचत की गई। 156 कृषि तालाबों और 4 नए चेक डैम से किसानों को सिंचाई सुविधा मिली, जिससे फसल उत्पादन बढ़ा। 4.23 लाख मानव-दिवस रोजगार (52 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी) सृजित हुआ। पहले सूखे बोरवेल अब जल से भरपूर हैं, जिससे गाँवों में सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई।

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