पटना , जनवरी 16 -- बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने शुक्रवार को कहा कि जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं।
कृषि मंत्री श्री यादव ने आज राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 को संबोधित करते हुये कहा कि पानी ही जीवन है। इसके बिना मानव, प्रकृति और सभ्यता का अस्तित्व संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य। हमारी सांस्कृतिक परंपरा में नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है। पंचतत्व-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश पर आधारित यह दर्शन बताता है कि प्रकृति की रक्षा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत है।
श्री यादव ने कहा कि जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट 2.0 के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों एवं उत्तर बिहार के बेगूसराय को मिलाकार कुल 18 वर्षा-आश्रित जिलों में 35 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार द्वारा 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत 496 हेक्टेयर में पौधारोपण, 282 पक्के चेक डैम, 62 खेत तालाब, 361 जल संचयन तालाब, 756 आहर-पईन का जीर्णोद्धार तथा 344 कुओं का निर्माण/जीर्णोद्धार किया गया है।उन्होंने कहा किनये वित्तीय वर्ष में पीएमकेएसवाई 3.0 की शुरूआत होगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग नौ लाख हेक्टेयर भूमि भू-क्षरण से प्रभावित है। इसे रोकने के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन के माध्यम से तालाबों, आहर-पईन की उड़ाही, सौंदर्यीकरण, पौधारोपण और जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा जल को पाइपलाइन से नालंदा, राजगीर, गया और नवादा तक पहुंचाना जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है।उन्होंने बताया कि भारत में विश्व का लगभग चार प्रतिशत शुद्ध जल उपलब्ध है, जिसमें से 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि में होता है। इसलिए कृषि के लिए जल का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के "फोर-आर" रिड्यूस, रीयूज, रिचार्ज और रिसाइकल और "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" अभियान से जल संरक्षण को नई दिशा मिली है। उन्होंने युवाओं और जीविका दीदियों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी के माध्यम से जल संचयन और संरक्षण को जनांदोलन बनाएं।
इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि मानव जीवन में भूमि की भूमिका जन्म से लेकर मृत्यु तक अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मृदा की ऊपरी परत को अमूल्य पूंजी बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मृदा की उर्वर ऊपरी परत के संरक्षण के लिये ठोस प्रयास किए जाने चाहिए तथा इसके दीर्घकालीन भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महोत्सव के माध्यम से मृदा की ऊपरी परत के क्षरण को रोकने और भूमि संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रभावी एवं महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।
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