जगदलपुर , फरवरी 19 -- छत्तीसगढ में जगदलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल और स्वच्छता के मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल देखी गई। यूनिसेफ की जल, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्वेता पटनायक ने आड़ावाल ग्राम पंचायत का सघन भ्रमण कर ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और स्वच्छता ढांचे का बारीकी से निरीक्षण किया। उनके इस प्रवास की शुरुआत समीक्षा बैठक से हुई, जिसमें सरपंच, उपसरपंच, स्वच्छ भारत मिशन के समन्वयक और श्रृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट के प्रतिनिधियों सहित पंचायत की पूरी टीम ने हिस्सा लिया।

जिला पीआरओ से गुरुवार मिली जानकारी के अनुसार,बैठक के दौरान सुश्री पटनायक ने पंचायत के विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्रामीण स्तर पर जल और स्वच्छता सेवाएं न केवल उपलब्ध होनी चाहिए, बल्कि वे सतत और सुदृढ़ भी हों। चर्चा के मुख्य केंद्र में घर-घर नल कनेक्शन की स्थिति और फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण जैसे तकनीकी विषय रहे। साथ ही उन्होंने पंचायत की वित्तीय आत्मनिर्भरता के लिए जल एवं स्वच्छता कर की वसूली स्थिति की समीक्षा की और इस पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता ग्राहियों, पंप ऑपरेटरों तथा जल वाहिनी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को सराहा।

संवाद के पश्चात जमीनी हकीकत परखने के लिए पटनायक ने समूचे क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए बनाए गए सेग्रीगेशन शेड का निरीक्षण किया और घर-घर जाकर नल कनेक्शनों के माध्यम से हो रही जलापूर्ति की गुणवत्ता देखी। कचरा संग्रहण की व्यवस्था का जायजा लेते हुए उन्होंने स्थानीय टीम को स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

गौरतलब है कि आड़ावाल पंचायत को हाल ही में जल जीवन मिशन के तहत 'हर घर जल' प्रमाणन मिल चुका है, जहां लगभग 95 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध हैं। यूनिसेफ की विशेषज्ञ ने इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि अब जरूरत है इन सुविधाओं के रखरखाव और संचालन को और मजबूत करने की ताकि यह मॉडल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सके।

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