पटना , जनवरी 09 -- प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के जल कृषि बीमा योजना के तहत कतला, रोहु, मुगल, कॉमन कार्प जैसी देशी मछलियां पालने वाले मत्स्य कृषकों को आर्थिक सुरक्षा और किफायती बीमा का लाभ दिया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य मीठे जल मे मछली पालने वाले मत्स्य कृषकों को किफायती बीमा विकल्पों तक पहुंच प्रदान करके प्रोत्साहित करना और उनके व्यवसाय को प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करना है।
पीएम - एमकेएसएसवाई के योजना के तहत एक्वाकल्चर(जल कृषि) किसानों, मत्स्य पालकों, केजकल्चर से जुड़े मत्स्य कृषक, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी संस्थाओं, मत्सय पालक उत्पादक संघ और मछली पालन से जुड़े सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी, बीमा के लिए पूरी तरह पात्र होंगे। इस योजना के अंतर्गत एक्वाकल्चर फार्म/तालाब के अलावा रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर( पुनर्चक्रण आधारित कृषि प्रणाली) सिस्टम, केज , बायोफ्लोक और रेसवे को भी शामिल किया गया है।इस योजना के तहत सरकार द्वारा दो प्रकार के बीमा विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।पहला मूलभूत बीमा, जो बाढ़, चक्रवात, प्रदूषण, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान करता है।दूसरा व्यापक बीमा,जिसमें मूलभूत बीमा के सभी जोखिमों के साथ-साथ मछलियों में होने वाले रोगों और अतिरिक्त जोखिमों से भी सुरक्षा दी जाती है।
योजनांतर्गत जो किसान इस योजना के तहत प्रीमियम राशि का भुगतान कर बीमा पॉलिसी लेते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से प्रीमियम राशि का 40 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में वापस दिया जाता है।
इसके साथ ही अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जाता है। इस योजना में एक मुश्त प्रोत्साहन राशि की अधिकतम सीमा एक लाख रुपए है, वहीं छोटे किसानों को अधिकतम एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं को अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि यानी, कुल एक लाख 10 हजार रुपए दिया दिया जाएगा। एक मुश्त प्रोत्साहन राशि के लिये फार्म साइज की पात्रता जल विस्तार क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपाए तथा अधिकतम चार हेक्टेयर वाटर स्प्रेड एरिया तक है, एवं अन्य गहन एक्वाकल्चर प्रणालियों जैसे रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम, केज , बायोफ्लोक और रेसवे की सीमा 1800 घनमीटर है।
योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-425-1660/ 1800-345-6185 पर संपर्क किया जा सकता है।इसके अलावा, जिला मत्स्य कार्यालय में जाकर भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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