चेन्नई , फरवरी 05 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण की न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण ने गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों को जवाबदेही, नैतिक शासन और जिम्मेदार पर्यावरण प्रथाओं के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

न्यायमूर्ति सत्यनारायण ने राष्ट्रमंडल चिकित्सा संघ (सीएमए) और भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), तमिलनाडु शाखा के तत्वाधान में आज यहां एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित 'जलवायु परिवर्तन शमन पर वैश्विक शिखर सम्मेलन: स्वास्थ्य सेवा परिप्रेक्ष्य' विषय पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रत्यक्ष खतरा है। स्वास्थ्य सेवा संस्थानों को जवाबदेही, नैतिक प्रबंधन और जिम्मेदार पर्यावरणीय प्रथाओं के जरिये नेतृत्व करना चाहिए। इस तरह के शिखर सम्मेलन नीति को कार्यान्वयन में बदलने में मदद करते हैं।

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