लखनऊ , नवंबर 15 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में जलजीवन मिशन को समुचित ढंग से अमल में लाने के मामले में स्वयं संज्ञान लेकर जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज कराई है।

साथ ही मामले में जवाब दाखिल न करने वाले पक्षकारों को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले में केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग, यू पी जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक समेत सात पक्षकार बनाए गए हैं। कोर्ट ने इससे पहले, मिशन को समुचित ढंग से लागू करने के आग्रह वाली याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता को मामले से अलग कर दिया।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश ' सुओ मोटो इन री - प्रॉपर इंप्लीमेंटेशन ऑफ द जल जीवन मिशन(जे जे एम)' शीर्षक से दर्ज पी आई एल पर दिया। इसमें प्रदेश में जल जीवन मिशन परियोजना के क्रियान्वयन में कई अनियमितताओं के आरोप लगाकर, मिशन को प्रदेश में समुचित ढंग से लागू करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

कोर्ट ने पहले दाखिल याचिका में दिए गए ब्यौरे और बीते 28 अक्तूबर को मामले में दिए गए आदेश के तहत पक्षकारों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में सहयोग के लिए शुभम त्रिपाठी को बतौर न्यायमित्र अधिवक्ता भी नियुक्त किया है। कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

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