बर्लिन , मार्च 15 -- जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक और सामाजिक विचारक युर्गेन हाबरमास का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी शनिवार को उनके प्रकाशक सुह्रकैंप वर्लाग ने दी।

जर्मनी के डसेलडोर्फ में 1929 में जन्मे हाबरमास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में जर्मनी के सबसे प्रभावशाली दार्शनिकों और सार्वजनिक बुद्धिजीवियों में गिने जाते थे। उन्होंने 1960 के दशक में फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र और समाजशास्त्र का अध्यापन शुरू किया और उस समय पश्चिम जर्मनी के विश्वविद्यालयों में हुए छात्र आंदोलनों का समर्थन किया।

हाबरमास को फ्रैंकफर्ट स्कूल का प्रमुख विचारक माना जाता है, जो पूंजीवाद की आलोचना करने वाली नयी वामपंथी बौद्धिक परंपरा से जुड़ा रहा। इस विचारधारा ने यह तर्क दिया कि पूंजीवादी समाज नागरिकों को सक्रिय भागीदारी से दूर कर उपभोक्ता संस्कृति की ओर धकेल देता है।

उन्होंने जनसंचार माध्यमों और मनोरंजन उद्योग के व्यावसायीकरण की आलोचना करते हुए कहा था कि व्यापक रूप से उत्पादित संस्कृति सार्वजनिक बहस और आलोचनात्मक संवाद को कमजोर करती है।

हाबरमास की सबसे प्रसिद्ध कृति द थ्योरी ऑफ कम्यूनिकेटिव एक्शन मानी जाती है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि समाज केवल राजनीतिक या आर्थिक शक्ति से नहीं बल्कि तार्किक संवाद की क्षमता से संचालित होता है।

उन्होंने 1980 के दशक में उन इतिहासकारों का विरोध किया था जिन्होंने हॉलोकॉस्ट को जर्मनी की विशिष्ट ऐतिहासिक घटना मानने पर प्रश्न उठाया था। बाद के वर्षों में उन्होंने एकीकृत यूरोप का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रवादी प्रतिस्पर्धाओं के पुनरुत्थान के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम बताया।

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