जयपुर , मार्च 22 -- अखिल भारतीय साहित्य परिषद जयपुर विभाग की ओर से "राष्ट्र साधना के सौ वर्ष" विषय पर रविवार को यहां काव्य संध्या का आयोजन किया गया।

काव्य संध्या का शुभारंभ मां भारती और मां शारदे के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। काव्य संध्या के संयोजक रवि पारीक ने बताया कि जयपुर में परिषद की ओर से पहली बार हुए इस आयोजन में देश प्रदेश से आए हुए राष्ट्रभक्त कवियों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से जयपुर को देशभक्ति के रंग से सराबोर कर दिया।

उन्होंने बताया कि इस काव्य संध्या के मुख्य अतिथि विधायक गोपाल शर्मा थे।

दिल्ली से आए कवि डॉ प्रवीण आर्य ने मातृभूमि की वंदना करते हुए काव्य पंक्तियां प्रस्तुत कीधौलाना उत्तरप्रदेश से आए हुए दास आरोही ने अपनी कविता में भारतवर्ष के सपूतों के संस्कार पर काव्य प्रस्तुत दी । अमर राष्ट्र की दिव्य साधना को कविता में ढालते हुए ओज और वीर रस के प्रख्यात राष्ट्रीय कवि विनीत चौहान ने श्रोताओं में राष्ट्रभक्ति का संचार किया। बीकानेर की कवयित्री मोनिका गौड़ ने भारत की नारी शक्ति केे विराट स्वरुप और वंदे मातरम की महिमा को अपनी कविता में प्रस्तुत किया। बाड़मेर से आए हुए राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि गोरधन सिंह सोढा 'जहरीला' ने भारतीय स्वतंत्रता से उपजे गहरे विभाजन के दंश और उसके उपरांत के मोहभंग को अपनी मातृभाषा में प्रस्तुत किया। कोटपुतली के कवि नवनीत गौड़ ने अपने सरस मुक्तकों से मां भारती के सच्चे साधकों को शब्द सुमन अर्पित करते हुए काव्य प्रस्तुति दी।

उदयपुर के कवि सुरेन्द्र सिंह राव ने प्रचारक के त्याग और बलिदान को अपनी कविता में महिमामंडित करते हुए कहा "प्रचारक है यह तो संघ का है संस्कृति का रखवाला। जग सिरमौर बने यह भारत है स्वप्न नयन में पाला। " बांसवाड़ा के कवि बृजमोहन तूफ़ान ने अपनी छंद मुक्त कविता में मां भारती के कर्मयोगी स्वयंसेवक के विविध परोपकारी स्वरूप को अपनी कविता में प्रस्तुत किया। चित्तौड़गढ़ के कवि कृष्णार्जुन पार्थभक्ति,कोटा के कवि राजेंद्र गौड़, महाराष्ट्र के कवि प्रवीण श्रीराम देशमुख, जयपुर के प्रसिद्ध गीतकार विकास तिवारी ने अपनी काव्य प्रस्तुतियां दी।

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