जयपुर , फरवरी 03 -- "दुनिया भर में सिर एवं गर्दन के कैंसर के कुल मामलों में से लगभग एक-तिहाई मामले भारत में होते हैं, जिसका मुख्य कारण तंबाकू और जीवनशैली आदतें हैं वहीं प्रति एक लाख आबादी पर कैंसर रोगियों की संख्या के मामले में जयपुर राजस्थान का सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है।
विश्व कैंसर दिवस के एक दिन पहले यहां फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल जयपुर द्वारा एक विशेष कैंसर जागरूकता हेल्थ टॉक का आयोजन किया गया और इसके बाद अस्पताल के चिकित्सकों ने मीडिया को यह जानकारी दी। अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डा दिवेश गोयल ने कहा, "राजस्थान में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। राजस्थान कैंसर के मामलों में "खतरनाक वृद्धि" का सामना कर रहा है, जिसमें होंठ, मुंह और ग्रसनी और पाचन अंगों में बीमारी की सबसे अधिक व्यापकता है, इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रति एक लाख आबादी पर कैंसर रोगियों की संख्या के मामले में जयपुर राज्य का सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है।"सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नरेश कुमार सोनी ने कहा "भारत में लगभग 60-70 प्रतिशत कैंसर के मामलों में इलाज के दौरान किसी न किसी समय सर्जरी की आवश्यकता होती है। शुरुआती चरण में पता चलने से उपचारात्मक सर्जरी की संभावना काफी बढ़ जाती है, जटिलताएं कम होती हैं और रिकवरी में सुधार होता है। सामुदायिक जागरूकता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि मरीज़ समय पर चिकित्सा देखभाल लें।"सिर और गर्दन के कैंसर से जुड़ी चिंताओं पर ज़ोर देते हुए , फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के कंसल्टेंट ऑन्को सर्जरी (हेड एवं नेक) विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार शर्मा ने कहा "दुनिया भर में हेड एवं नेक के कैंसर के कुल मामलों में से लगभग एक-तिहाई मामले भारत में होते हैं, जिसका मुख्य कारण तंबाकू और लाइफस्टाइल की आदतें हैं। दुर्भाग्य से, जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों का पता देर से चलता है। मुंह में लगातार छाले, निगलने में दिक्कत, या आवाज़ में बदलाव जैसे लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती जांच जान बचा सकती है। सिर और गर्दन के कैंसर राजस्थान में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, कुछ अध्ययन के अनुसार यह सभी कैंसर का 32 प्रतिशत से ज़्यादा है, जिसमें मुंह, ऑरोफैरिनक्स और लैरिंक्स के कैंसर के मामले ज़्यादा हैं, जिसका मुख्य कारण तंबाकू का इस्तेमाल है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को कैंसर की शुरुआती पहचान, समय पर जांच, रोकथाम और आधुनिक इलाज के बारे में जागरूक करना था जिसमें इस हेल्थ टॉक में मरीजों, उनके परिजनों और शहर के कई नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
चिकित्सकों ने बताया कि कैंसर का समय पर पता लगने से इलाज ज्यादा सफल होता है और मरीज की जीवन-गुणवत्ता बेहतर रहती है। विशेषज्ञों ने कैंसर के शुरुआती लक्षणों, नियमित स्क्रीनिंग की अहमियत, स्वस्थ जीवनशैली और मल्टी-डिसिप्लिनरी इलाज की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कैंसर से जुड़े कई आम मिथकों को भी दूर किया गया।
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