श्रीनगर , अक्टूबर 30 -- जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के चौथे दिन गुरुवार को उस समय हंगामे की स्थिति निर्मित हो गयी जब अध्यक्ष ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास पर चर्चा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
सत्र शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने हाल ही में आयी बाढ़ से हुए नुकसान पर चर्चा की मांग की। इस पर अध्यक्ष ने सदन को सूचित किया कि उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार कर दिया है लेकिन चर्चा के लिए विकल्प तलाशेंगे। इस फैसले से नाखुश भाजपा विधायकों ने विरोध जारी रखा। इसके बाद अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता सुनील शर्मा को संक्षेप में अपनी बात रखने की अनुमति दी।
श्री शर्मा ने चर्चा से इनकार किए जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा,"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन भारी बारिश के कारण आई बाढ़ के प्रभाव पर चर्चा नहीं कर रहा है। लोगों को उम्मीद है कि उनके मुद्दों का समाधान यहां किया जाएगा।" उन्होंने सड़क एवं भवन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली एक समाचार रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसके बाद भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के बीच तीखी बहस हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
हंगामे के बीच, तीन भाजपा विधायक सदन के वेल में कूद पड़े और उन्हें मार्शलों द्वारा बाहर निकाल दिया गया। नारेबाजी और हंगामे के बावजूद हंगामे के बीच प्रश्नकाल जारी रहा।
प्रश्नकाल समाप्त होते ही भाजपा विधायक सदन से बहिर्गमन कर गए।
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