श्रीनगर , अप्रैल 01 -- जम्मू-कश्मीर के 3,100 से अधिक सरकारी स्कूलों में वर्ष 2022 से छात्रों का नामांकन शून्य या 10 से कम रहा है, जबकि इन संस्थानों में 2,500 से अधिक शिक्षक तैनात हैं।

यह आंकड़ा विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आर एस पठानिया के एक सवाल के लिखित जवाब में राज्य की शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू द्वारा जारी किया गया।

आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र शासित प्रदेश के कुल 3,192 स्कूल शून्य या 10 से कम नामांकन वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि इन स्कूलों में वर्तमान में 2,518 शिक्षक कार्यरत हैं।

जम्मू संभाग में ऐसे 508 स्कूलों के साथ कठुआ जिला शीर्ष पर है, इसके बाद उधमपुर में 188, राजौरी में 174, रियासी में 161, जम्मू में 130, डोडा में 111 और किश्तवाड़ में 89, सांबा से 60, रामबन में 56 और पुंछ से 17 ऐसे स्कूल हैं। कुल मिलाकर, जम्मू संभाग में कम नामांकन वाले 1,494 स्कूल हैं, जहाँ वर्तमान में 1,934 शिक्षक तैनात हैं।

कश्मीर संभाग में, बारामूला में सबसे अधिक 396 स्कूल दर्ज किए गए, इसके बाद शोपियां में 270, कुपवाड़ा में 228, अनंतनाग में 168, बांदीपोरा में 156, गांदरबल में 138, पुलवामा में 102, बडगाम में 96, श्रीनगर में 90 और कुलगाम में 54 स्कूल हैं। कश्मीर संभाग में ऐसे कुल 1,698 स्कूल हैं जिनमें 584 शिक्षक तैनात हैं।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व शिक्षा मंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता नईम अख्तर ने कहा कि यह आंकड़ा शिक्षा के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

श्री अख्तर ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि कानून-व्यवस्था के दबाव से मुक्त होने के कारण जम्मू-कश्मीर सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक काम करेगी। इसके बजाय, यह शिक्षा के बुनियादी मुद्दों को हल करने में विफल रही है, जिससे विभाग केवल शिक्षकों के लिए रोजगार का स्रोत बनकर रह गया है।"एक शिक्षाविद् ने कहा कि शून्य या 10 से कम छात्र नामांकन वाले स्कूलों में इतने सारे शिक्षकों की तैनाती कुप्रबंधन का मुद्दा है न कि शासन की विफलता।

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