श्रीनगर , दिसंबर 18 -- जम्मू कश्मीर पुलिस के खुफिया तंत्र (सीआईके) ने साइबर सुरक्षा और नए आपराधिक कानूनों पर चार दिवसीय ओरिएंटेशन और क्षमता-विस्तार कार्यक्रम शुरू किया, जिसका मकसद जांच दक्षता बढ़ाना और कानूनी रूप से मजबूत जांच सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में सीआईके के विभिन्न जिलों और विशेष इकाइयों के अधिकारियों ने भाग लिया।

सूत्रों ने बताया कि चार दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स साइबर अपराध से पैदा होने वाली समकालीन चुनौतियों पर केंद्रित है। इसमें साइबर आतंकवाद, ऑनलाइन कट्टरपंथ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग, सुरक्षित संचार, आतंकी नेटवर्क की डिजिटल फंडिंग और सीमा पार साइबर खतरे जैसे विषयों पर आयोजित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) वाले नए आपराधिक न्याय ढांचे के अनुरूप आतंकवाद से संबंधित मामलों में जांच क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के मुख्य घटकों में उन्नत साइबर अपराध जांच तकनीक, डिजिटल फोरेंसिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को संभालना और उसकी स्वीकार्यता, साइबर खतरे का आकलन, साइबर स्वच्छता और अपराधों की जांच, अभियोजन और मुकदमे में नए आपराधिक कानूनों का व्यावहारिक अनुप्रयोग शामिल है, जिसमें आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े अपराध भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि ये सत्र अनुभवी अभियोजन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों द्वारा संवादमूलक व्याख्यान, केस स्टडी और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से आयोजित किए गए। इस पहल से जांच दक्षता में काफी मजबूती आने, कानूनी रूप से मजबूत जांच सुनिश्चित होने और केंद्र शासित प्रदेश में साइबर और आतंकवाद से संबंधित अपराधों के प्रति पुलिस में सुधार होने की उम्मीद है।

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