श्रीनगर , फरवरी 16 -- जम्मू कश्मीर पुलिस ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से चलने वाले करोड़ों रुपए के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन निवेश घोटाले का पर्दाफाश कर कथित मास्टरमाइंड सहित नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने सोमवार को बताया कि यह मामला सफापोरा के फिरदौस अहमद मीर की शिकायत पर गंदेरबल थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें 'पहचान की चोरी' और ऑनलाइन धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। प्राथमिकी पर कार्रवाई करते हुए गंदेरबल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) खलील अहमद पोसवाल ने गिरोह की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। जांच से पता चला है कि जालसाज पीड़ितों को सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर फर्जी निवेश वेबसाइटों के प्रचार के माध्यम से लुभाते थे और क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के माध्यम से उच्च मुनाफे का वादा करते थे।
पुलिस ने कहा, "एक बार जब पीड़ित निवेश कर देते थे, तो फंड को गंदेरबल, बड़गाम, श्रीनगर और बारामूला के स्थानीय बैंक खातों में भेजा जाता था। इसके बाद पैसे के लेन-देन के निशान छिपाने के लिए इसे विदेशों तक स्थानांतरित कर दिया जाता था।"पुलिस ने हरियाणा के हिसार निवासी एकांत योगदत्त उर्फ "डॉ. मॉर्फिन" की पहचान गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में की है। उसने कथित तौर पर फिलीपींस में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के दौरान साइबर धोखाधड़ी की तकनीक सीखी थी और चीनी नागरिकों के साथ संबंध बनाए रखे थे। उसे चीन से लौटते समय दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने कहा कि कथित मास्टरमाइंड ने कश्मीर के कई स्थानीय सहयोगियों के साथ साजिश रची थी, जिन्होंने अलग-अलग जगहों के सरगनाओं और खाता जुटाने वालों के रूप में काम किया। पुलिस द्वारा पहचाने गए लोगों में गंदेरबल के मोहम्मद इब्राहिम शाह उर्फ यावर और नासिर अहमद गनी, बड़गाम के मकसूद अहमद उर्फ 'डॉ अल्बर्ट' और तनवीर अहमद उर्फ 'डॉ मार्टिन'; बारामूला के एक सरकारी शिक्षक तौसीफ अहमद मीर, नुन्नर के खुर्शीद अहमद और सफापोरा के इशफाक अहमद शामिल हैं।
जांचकर्ताओं ने कहा कि कश्मीर में स्थानीय गुर्गों ने क्षेत्रीय समन्वयकों के रूप में काम किया, जो कथित तौर पर गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के खाताधारकों को 8,000-10,000 रुपये प्रति माह के बदले बैंक खाते और एटीएम कार्ड प्रदान करने के लिए मनाते थे। जांचकर्ताओं ने कुछ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता भी पाई, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी प्लेटफॉर्म पर उपयोग किए जाने वाले 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खोले गए खाते) से जुड़े क्यूआर कोड की सुविधा प्रदान की थी।
जब भी देश भर की साइबर इकाइयों द्वारा खाते फ्रीज किए जाते थे, आरोपी नए क्यूआर कोड प्रसारित करने के लिए टेलीग्राम चैनल का उपयोग करते थे।
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