श्रीनगर , जनवरी 05 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को आरोप लगाया कि क्षेत्रीय नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ राजनीतिक बयान जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद से भी बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं।

पार्टी प्रवक्ता रजनी सेठी ने संवाददाता सम्मेलन में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेतृत्व पर लगातार विभाजनकारी बयान देने का आरोप लगाया, जो उनके अनुसार, सांप्रदायिक सद्भाव, विकास और क्षेत्र की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुश्री सेठी ने कहा कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने धार्मिक भेदभाव के बिना जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं और शासन संबंधी पहलें सभी समुदायों को समान रूप से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई हैं और पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया हालांकि क्षेत्रीय दल, विशेष रूप से नेकां और पीडीपी, राजनीतिक वर्चस्व खोने से असहज हैं और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाले बयानों का सहारा ले रहे हैं।

प्रवक्ता ने कहा, "मुझे लगता है कि जम्मू-कश्मीर में गैर-जिम्मेदार राजनीति से हुआ नुकसान कई मायनों में आतंकवाद से हुए नुकसान से कहीं अधिक है। आतंकवादी बाद में हम पर हमला करेंगे लेकिन इन बयानों के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हमें हो रहा है। कश्मीर आज पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है। कश्मीरी लोगों को शक की नजरों से देखा जा रहा है।.आप सोच रहे होंगे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को संदेह की नज़र से क्यों देखा जा रहा है। ध्रुवीकरण करने वाले बयान देने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और महबूबा को लेनी चाहिए।"उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा दिए जा रहे बयान भय पैदा करते हैं, पर्यटन को हतोत्साहित करते हैं और जम्मू-कश्मीर के बारे में नकारात्मक रूढ़ियों को मजबूत करते हैं। राष्ट्रीय एकता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सुश्री सेठी ने क्षेत्रीय नेताओं की आलोचना की, जो राष्ट्रीय प्रतीकों और नारों के प्रति निष्ठा व्यक्त करने से इनकार करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे रुख से जनता का विश्वास कमजोर होता है और राष्ट्र-विरोधी तत्वों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को मुस्लिम-विरोधी के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं करना चाहिए बल्कि इसे राष्ट्र और उसके लोगों के प्रति प्रेम के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए।

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