नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि मल कीचड़ प्रबंधन (एफएसएम) सतत ग्रामीण स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण घटक है और संपूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से बुधवार को बताया गया कि मंत्रालय ने छह जनवरी को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के साथ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत देश में लागू किए जा रहे एफएसएम के विभिन्न मॉडलों पर चर्चा करने के लिए एक वर्चुअल संवाद का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता श्री पाटिल ने की।
श्री पाटिल ने स्वच्छ भारत अभियान में योगदान देने वाले और साथ ही आय एवं आजीविका के अवसर सृजित करने वाले अभिनव मॉडल प्रदर्शित करने के लिए प्रतिभागियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इनमें से कई पहलें दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में लागू की गई हैं, जो यह साबित करती हैं कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां स्थायी समाधानों को जन्म देती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि एफएसएम सतत ग्रामीण स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण घटक है और संपूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एफएसएम समाधानों को व्यवहार्य, समावेशी और दीर्घकालिक बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी, स्वयं सहायता समूहों, पंचायतों और विभिन्न हितधारकों की सहभागिता और संदर्भ-विशिष्ट, आवश्यकता-आधारित और उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, स्वच्छता के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने अभूतपूर्व गति प्राप्त की है जिससे गांधीजी का स्वच्छता और जनभागीदारी का सच्चा संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचा है।
मंत्रालय ने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य संपूर्ण स्वच्छता मूल्य श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों से सफल और विस्तार योग्य एफएसएम मॉडल साझा करना, एफएसएम के विभिन्न पहलुओं पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों के बीच आपसी ज्ञानवर्धन को मजबूत करना और शौचालय निर्माण से परे सुरक्षित स्वच्छता प्रणालियों के महत्व को सुदृढ़ करना था।
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