नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- राज्यसभा ने पुराने और गैर जरूरी 80 केंद्रीय कानूनों में अनेक संशोधन करके कुछ छोटे- मोटे अपराधों और दंड को अपराधों की श्रेणी से बाहर करने वाले जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 को गुरुवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

इसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी क्योंकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विधेयक पर दो घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के सदस्योंं की सभी आशंकाओं और आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि यह देश विकसित राष्ट्र की यात्रा में विश्वास के साथ आगे बढे न कि दंड के डर या भय से। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में दंड के प्रावधानों को संतुलित किया गया है और सरकार का मानना है कि भय के कारण कानून का पालन तो किया जा सकता है लेकिन इसका समाज पर प्रभाव अच्छा नहीं पड़ता। उन्होंने सदस्यों के इन आरोपों को भी निराधार बताया कि इससे लोगों को कानून तोड़ने की छूट मिल गयी है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोगों को एक संदेश भी देता है कि वे बिना किसी संकोच के साथ देश हित में काम करें और उन्हें बेवजह परेशान नहीं किया जायेगा। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

श्री गोयल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप जनता पर विश्वास बढ़ाने के लिए कानूनों का सरलीकरण करने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह 21 वीं सदी का 'रामराज्य' है और इसमें सरकार का मूल मंत्र नागरिकों की परेशानी को कम करना है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह कानून जनता के विश्वास को आगे बढाने के लिए लाया गया है और सरकार का मानना है कि वह जनता को विश्वास में लेकर शासन करे और छोटी मोटी गलतियों के लिए लोगों को न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़े। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में कुछ कानूनों को सख्त भी किया गया है जिससे नागरिकों में सुरक्षा का भाव बना रहे कि देश में उनकी सुरक्षा के लिए कानून है।

उन्होंने कहा कि जिन कानूनों में संशोधन किया गया है उनमें से अनेक अंग्रेजों के समय के हैं और बहुत पुराने हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को व्यापक विचार विमर्श के बाद लाया गया है और इसमें ऐसे किसी कानून में बदलाव नहीं किया गया है जिसका प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

श्री गोयल ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोगोंं को छोटी मोटी गलतियों पर बेवजह बहुत अधिक परेशान नहीं किया जाये। उन्होंने कहा कि कंपनी एक्ट तथा आयकर अधिनियम को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जायेगी और मामूली अपराधों के मामले में संशोधन किया गया है। उन्होंने इस आरोप को भी गलत बताया कि ताकतवर लोग जुर्माना देकर छूट जायेंगे।

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