मथुरा , जनवरी 02 -- न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए जोहरान ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने के बाद अब भारत में भी धार्मिक ग्रंथों पर शपथ लेने की मांग तेज हो गई है। गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ महाराज ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा समर्थन व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत में जनप्रतिनिधियों को श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण पर हाथ रखकर शपथ लेनी चाहिए। शंकराचार्य ने तर्क देते हुए कहा कि भारत हिंदुओं का देश है और यहाँ की संस्कृति की जड़ें हमारे पवित्र ग्रंथों में निहित हैं।

उन्होंने कहा, "देश का संविधान समय-समय पर बदलता रहता है और उसमें आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाते हैं, लेकिन हमारे धर्मग्रंथ शाश्वत और अपरिवर्तनीय हैं।" उनके अनुसार, पवित्र ग्रंथों की शपथ लेने से जनप्रतिनिधियों में नैतिकता और जिम्मेदारी का भाव अधिक गहराई से पैदा होगा। स्वामी अधोक्षजानंद ने न्यूयॉर्क की हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब विदेशों में लोग अपने धर्म और आस्था के अनुसार शपथ ले सकते हैं, तो भारत में अपनी मूल संस्कृति और ग्रंथों का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामायण और गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने का आधार और न्यायप्रियता का प्रतीक हैं।

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