भोपाल , नवम्बर 12 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग हमारी संस्कृति की आत्मा है और उनकी परंपराएं भारतीय संस्कृति की जड़ हैं। मध्यप्रदेश, देश का सर्वाधिक जनजातीय आबादी वाला प्रदेश है, जहाँ 21 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदाय की है। राज्य सरकार उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ऑल इंडिया एनजीओ मीट का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के साथ कदम से कदम मिलाकर कार्य करेगी। इन संस्थाओं की भूमिका शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और वन अधिकार अधिनियम जैसे क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनजातीय जननायकों की स्मृतियों को सहेजना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसके तहत जननायकों की जीवनी को पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया है।

डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में जननायकों के सम्मान में अनेक संग्रहालय, स्मारक और विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। जबलपुर में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, रानी कमलापति और टंट्या मामा भील के नाम पर रेलवे स्टेशनों का नामकरण, तथा पचमढ़ी में राजा भभूत सिंह को समर्पित कैबिनेट बैठक इसका उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय गौरव को नई पहचान मिली है। केंद्र एवं राज्य सरकार ने जनजातीय सशक्तिकरण को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, पद्मश्री महेश शर्मा, स्वामी अनुरागानंद जी, तथा देशभर से आए विभिन्न एनजीओ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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