भुवनेश्वर , फरवरी 12 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पुरी के 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) संबंधी जस्टिस रघुबीर दास जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के आगामी सत्र में पटल पर रखे। अदालत ने इस मामले में किसी भी तरह की देरी को अस्वीकार्य बताया है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमन की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। खजाने की सुरक्षा पर जोर देते हुए अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि रत्न भंडार की वर्तमान सूची का मिलान वर्ष 1978 में तैयार की गयी सूची से किया जाये और इस पूरी प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा किया जाये।
पुरी मंदिर के रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के बेशकीमती सोने के आभूषण, रत्न, मोती और दुर्लभ हीरे जमा हैं। ये सदियों से भक्तों ने श्रद्धापूर्वक अर्पित किये हैं।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 'जांच आयोग अधिनियम, 1952' के प्रावधानों के तहत रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करना राज्य का अनिवार्य कर्तव्य है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, " इस मामले में राज्य सरकार द्वारा कोई ढिलाई नहीं दिखाई जानी चाहिए। यह राज्य का दायित्व है कि वह तत्परता दिखाए और सुनिश्चित करे कि 1978 में दर्ज सभी कीमती सामान, वर्तमान सूची के साथ पूरी तरह मेल खाते हों।"अदालत ने उम्मीद जतायी है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील और धार्मिक महत्व के मामले में तेजी से कार्रवाई करेगी ताकि करोड़ों भक्तों का विश्वास बना रहे।
गौरतलब है कि जून 2018 में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली तत्कालीन बीजद सरकार ने रत्न भंडार के 'भीतरी कक्ष' की चाबियां गायब होने पर भारी सार्वजनिक आक्रोश के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। न्यायमूर्ति रघुबीर दास आयोग ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। सरकार ने हालांकि इसे कैबिनेट के सामने रखने के लिए जून 2024 के चुनाव परिणामों तक का इंतजार करने का निर्णय लिया था।
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