जगदलपुर , मार्च 26 -- छत्तीसगढ के बस्तर अंचल की समृद्ध कला परंपराओं और लोक संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से 27 मार्च को जगदलपुर में भव्य भित्ति चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।

जिला प्रशासन बस्तर के सौजन्य से आयोजित इस प्रदर्शनी में स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता और पारंपरिक कला शैलियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

यह प्रदर्शनी बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (बादल) आसना तथा संस्कार भारती, बस्तर जिला इकाई के संयुक्त प्रयासों से आयोजित की जा रही है। आयोजन का केंद्र जगदलपुर स्थित दलपत सागर के समीप 'बस्तर आर्ट गैलरी' को बनाया गया है, जहां कला प्रेमियों को बस्तर की पारंपरिक कलात्मक अभिव्यक्तियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषता बस्तर शैली और रजवार शैली में तैयार किए गए भित्ति चित्र होंगे। इन कलाकृतियों में बस्तर के लोकजीवन, परंपराओं, उत्सवों और लोकगाथाओं की झलक देखने को मिलेगी। कलाकारों ने इन चित्रों के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति से जुड़े जीवन को सजीव रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

उल्लेखनीय है कि इन चित्रों का सृजन 'बादल' संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय सघन भित्ति चित्र कार्यशाला के दौरान किया गया था। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभाशाली कलाकारों ने भाग लेकर अपनी तूलिका के माध्यम से पारंपरिक कला रूपों को नए आयाम दिए।

कार्यशाला में तैयार कलाकृतियों को अब इस प्रदर्शनी में आमजन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शनी शुक्रवार को शाम चार बजे से रात्रि नौ बजे तक खुली रहेगी। कार्यक्रम के दौरान कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को न केवल उत्कृष्ट चित्रों को देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि बस्तर की लोक कला परंपरा को समझने का भी मौका मिलेगा।

आयोजकों ने प्रदेश के कला अनुरागी नागरिकों, प्रबुद्धजनों और विद्यार्थियों से इस प्रदर्शनी में शामिल होकर स्थानीय कलाकारों का उत्साहवर्धन करने और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जानने का आग्रह किया है।

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