अंबिकापुर , फरवरी 07 -- छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्वावलंबन और सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहा है।

सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत दरिमा की रहने वाली संध्या यादव इसकी एक जीवंत मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी घरेलू दायरे तक सिमटी और आर्थिक चुनौतियों से जूझने वाली संध्या आज 'लखपति दीदी' के नाम से पहचानी जाती हैं। जिला जन सम्पर्क अधिकारी (पीआरओ से शनिवार को मिली जानकारी के मुताबिक,संध्या ने एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 'बिहान' योजना के तहत 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इसमें उन्होंने स्वयं 2 लाख रुपये की व्यक्तिगत पूंजी भी जोड़ी और अपना व्यवसाय शुरू किया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और आज उनके उत्पादों की मासिक बिक्री लगभग 50,000 रुपये तक पहुंच गई है। इससे उन्हें प्रतिमाह 12,000 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हो रहा है।

संध्या ने बताया, "पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। 'बिहान' योजना ने मुझे आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। आज मैं न केवल अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर पा रही हूं, बल्कि समाज में मेरा एक सम्मानजनक स्थान भी है।"उनकी इस सफलता में उनके परिवार, विशेषकर उनके पति का पूरा सहयोग रहा, जो स्वयं खेती से जुड़े हैं। संध्या के परिवार में दो बच्चे और सास-ससुर हैं, जिनकी जिम्मेदारी अब वह आत्मविश्वास से निभा रही हैं।

संध्या ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बनी योजनाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने उन्हें एक नई पहचान दी है। अब वह अपने व्यवसाय का विस्तार करने और भविष्य में अन्य महिलाओं को भी रोजगार देने का सपना देखती हैं।

संध्या की यह यात्रा साबित करती है कि 'बिहान' जैसी योजनाएं सिर्फ वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता को पंख देकर उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और 'लखपति दीदी' के रूप में परिवर्तित करने का कारगर माध्यम बन रही हैं।

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