रायपुर , अप्रैल 02 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (की विशेष अदालत में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल सहित कुल 82 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। इनमें 59 नए आरोपी शामिल हैं, जिनमें 28 आबकारी विभाग के अधिकारी भी बताए जा रहे हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए।

अधिवक्ता फैजल रिजवी के अनुसार, इस प्रकरण में ईडी पहले ही आरोप पत्र प्रस्तुत कर चुकी थी। प्रारंभिक सूची में 23 आरोपी थे, जिसे अब विस्तारित करते हुए 82 किया गया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में बिना गिरफ्तारी के ही आरोप पत्र दाखिल किया है। कई आरोपियों ने अदालत में धारा 88 के तहत राहत के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं।

इस मामले में जांच एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने दो शराब निर्माण कंपनियों पर कार्रवाई करते हुए उनके वाहनों को जब्त किया। इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन से जुड़े एक अकाउंटेंट सहित चार व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल अब भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों ही उनकी भूमिका को लेकर जांच कर रही हैं और उनसे जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी है।

यह मामला कथित तौर पर 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी द्वारा की जा रही है। एजेंसी की शिकायत के आधार पर एसीबी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस प्रकरण में राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। इस सिंडिकेट में प्रशासनिक अधिकारी, आबकारी विभाग से जुड़े लोग और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।

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