जगदलपुर , नवंबर 02 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर की पावन धरा अब सिर्फ जंगलों और आदिवासी संस्कृति की गवाह नहीं रह गई, बल्कि बिजली की रोशनी हर गांव तक पहुंच चुकी है।
पिछले पच्चीस वर्षों में जगदलपुर ग्रामीण संभाग ने विद्युतीकरण के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह किसी क्रांति से कम नहीं है। वर्ष 2000 में जहां एक गांव तक बिजली पहुंचाना चुनौती थी, वहीं 2025 में हर मजरा-टोला और हर घर रोशनी से जगमगा रहा है। अब बस्तर जिले में विद्युतीकरण का स्तर 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
गांव-गांव में फैली विद्युत सुविधा ने जनजीवन को आसान बनाया है। खेती-बाड़ी और सिंचाई में किसानों को बड़ी राहत मिली है। कार्यपालन अभियंता जगदलपुर ग्रामीण संभाग पीके अग्रवानी के अनुसार, जगदलपुर ग्रामीण क्षेत्र के 577 गांव और शहरी क्षेत्र का एक गांव मिलाकर कुल 578 गांव अब पूरी तरह बिजली से जुड़ चुके हैं। मजरा-टोलों की संख्या 3989 से बढ़कर 5107 हो गई है और सभी तक बिजली की लाइनें पहुंच चुकी हैं।
33/11 केवी सब-स्टेशनों की संख्या छह से बढ़कर 27 हो गई है, जिनकी क्षमता 24 मेगावोल्ट एम्पीयर से बढ़कर 138.70 मेगावोल्ट एम्पीयर हो गई है। 11 केवी लाइनों की लंबाई 1390 किलोमीटर से बढ़कर 4850 किलोमीटर और कम वोल्टेज लाइनों की लंबाई 2257 से बढ़कर 6017 किलोमीटर तक पहुंच गई है।
झारा घाटी में नक्सली घटनाओं के बावजूद विभाग ने मजबूती से काम जारी रखा। इसी के तहत परचनपाल में लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से 400 केवी सब-स्टेशन का निर्माण किया गया, जिससे बिजली की स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई। साथ ही 132 केवी लाइनों का जाल 180 किलोमीटर से बढ़कर 254 किलोमीटर हो गया है।
वर्ष 2000 में जहां कुल उपभोक्ता 5380 थे, वहीं अब यह संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है। सामान्य उपभोक्ता 59 हजार से बढ़कर 1.68 लाख, विद्युत पंप उपभोक्ता 900 से बढ़कर 9083 और बीपीएल उपभोक्ता 30 हजार से बढ़कर 1.14 लाख तक पहुंच गए हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित