रायपुर , जनवरी 03 -- छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में लंबित नियुक्तियों को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रारुक के तूता धरना स्थल पर डीएड अभ्यर्थी 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनके अनशन का आज 11 वां दिन है।
अनशनरत अभ्यर्थियों की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। अब तक 30 से अधिक अभ्यर्थियों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है जबकि आंदोलन के 10वें दिन चार अभ्यर्थियों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
डीएड अभ्यर्थी सहायक शिक्षक भर्ती 2023 से जुड़े उस मामले को लेकर विरोध कर रहे हैं, जिसमें उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार पर नियुक्ति प्रक्रिया को अधूरा छोड़ने का आरोप है। अभ्यर्थी 24 दिसंबर से लगातार आमरण अनशन पर हैं।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2023 में राज्य सरकार ने 6285 सहायक शिक्षक पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें प्राथमिक शिक्षक पद के लिए डीएड और बीएड दोनों अभ्यर्थियों को पात्र माना गया। इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके बाद 10 जून 2023 को परीक्षा और दो जुलाई 2023 को परिणाम घोषित किया गया।
चार चरणों की काउंसलिंग के बाद 5301 पदों पर नियुक्तियां हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में बीएड अभ्यर्थी शामिल थे, जबकि सैकड़ों पदों पर काउंसलिंग नहीं हो सकी। बाद में दो अप्रैल 2024 को उच्च न्यायालय और 28 अगस्त 2024 को उच्चतम न्यायालय ने बीएड अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक पद के लिए अपात्र ठहराते हुए डीएड अभ्यर्थियों की मेरिट सूची बनाकर कर सभी पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद आदेशों के पूर्ण पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलनरत अभ्यर्थियों का आरोप है कि दिसंबर 2024 में केवल सीमित संख्या में बीएड अभ्यर्थियों को हटाया गया और बिना मेरिट सूची का पुनर्गठन किए पांचवें चरण की काउंसलिंग कराई गई। इस प्रक्रिया में मात्र 1299 डीएड अभ्यर्थियों को ही पात्र माना गया जिससे लगभग 2300 पद अब भी रिक्त हैं।
उच्च न्यायालय द्वारा 26 सितंबर 2024 को दो माह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन तय समयसीमा बीतने के बावजूद नियुक्ति नहीं होने से अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश है। डीएड अभ्यर्थियों की स्पष्ट मांग है कि शेष 2300 रिक्त पदों पर तत्काल छठवें चरण की काउंसलिंग कर नियुक्ति दी जाए ताकि न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके।
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