सुकमा/बीजापुर , फरवरी 07 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके सुकमा और बीजापुर जिले के 51 माओवादियों ने शनिवार को हिंसा का मार्ग त्याग कर मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण 'पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन' नामक एक विशेष अभियान के तहत किया गया।
इन माओवादियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए एके-47 राइफल, एसएलआर राइफल, इंसास राइफल, बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) जैसे अत्याधुनिक और गोला-बारूद भी जमा करा दिया। इन हथियारों का हस्तांतरण औपचारिक रूप से जमा किया है, जो राज्य सरकार की नक्सलवाद से निपटने की नीति और पुनर्वास के प्रयासों की एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
इस घटना को छत्तीसगढ़ में शांति और विकास की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में कैडरों का एक साथ मुख्यधारा में लौटना नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में एक मनोवैज्ञानिक विजय भी है। यह दर्शाता है कि हिंसा के बजाय बातचीत और पुनर्स्थापना का रास्ता अधिक प्रभावी हो सकता है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इन 51 माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी संभव सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाएगी। उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरे आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने समन्वय से कार्य किया।
पुलिस से ही मिली जानकारी के अनुसार, "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन" अभियान विशेष रूप से नक्सलवाद से प्रभावित युवाओं और कैडरों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाया गया एक विशेष प्रयास है। इस आत्मसमर्पण से जुड़े संपूर्ण विवरण, जिसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान, उनसे बरामद सामान उन पर घोषित ईनाम राशि आदि की जानकारी प्रक्रिया के पूर्ण होते ही साझा किए जाएंगे।
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