सुकमा , दिसंबर 07 -- छत्तीसगढ में सुकमा जिले के टॉप नक्सली दंपति दक्षिण सब-जोनल कमेटी सदस्य दिरदो विज्जल उर्फ जयलाल और उसकी पत्नी डीवीसीएम मडवी गंगी उर्फ विमला उर्फ भीमे ने आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (एएसआर) जिले में सरेंडर कर दिया है। राज्य पुलिस के लिए यह बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि दोनों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आंध्रप्रदेश राज्य के एलुरु सीथारामराजू जिले की पुलिस के अनुसार, दिरदो विज्जल, जो सुकमा के गगनपल्ली के बोडेगुब्बल गांव का निवासी है, 1994 में बाल संघम से माओवादी संगठन में शामिल हुआ था। लंबे समय तक दरभा डिवीजन में सैन्य प्रभारी और एसडीजेडसीएम पद पर रहते हुए उसने कई बड़ी नक्सल वारदातों में भूमिका निभाई। उसके खिलाफ घात लगाकर हमला, पुलिस कैंप पर हमले, दो मुठभेड़, बैंक डकैती और आईईडी ब्लास्ट जैसी घटनाओं में शामिल होने के आरोप दर्ज हैं।
उसकी पत्नी मडवी गंगी भी लगभग 20 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय रही। 2006 में संगठन में शामिल होने के बाद उसने कोंटा, बडेसट्टी, मलेंगर और जगारगोंडा क्षेत्रों में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। उसके ऊपर भी कई मुठभेड़ों और हिंसक घटनाओं में संलिप्तता के आरोप हैं।
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण के पीछे कई कारण रहे-सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई कार्रवाई, नए पुलिस कैंपों की स्थापना से गतिविधियों में आई बाधा, स्थानीय लोगों का माओवादी विचारधारा से दूर होना तथा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरकारों की पुनर्वास योजनाएँ। ये कारक दंपति के लिए संगठन छोड़ने के निर्णायक कारण बने।
एएसआर जिले के पुलिस अधीक्षक अमित बरदार और सुकमा के एएसपी (नक्सल ऑप्स) ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों के लिए सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने अन्य माओवादी सदस्यों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
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