रायपुर , जनवरी 06 -- छत्तीसगढ़ में चल रही विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने गहरी चिंता जताते हुए इसे एक "प्रशासनिक विफलता" और "लोकतंत्र पर हमला" बताया है।

पार्टी ने आज यहां एक प्रेस वार्ता में दावा-आपत्ति और सत्यापन की समयसीमा को छह माह बढ़ाने सहित कई मांगों को रखा।

पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम चंद्राकर ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत राज्य के 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम बिना कारण बताए या पर्याप्त सुनवाई के सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा, "यह प्रक्रिया गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघनों से ग्रस्त है और सीधे नागरिकों के संवैधानिक अधिकार पर प्रहार करती है।"पार्टी के अधिकारियों ने प्रक्रिया में कई खामियों की ओर इशारा किया। प्रदेश सचिव संतोष कुशवाहा ने कहा, "घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कई क्षेत्रों में नहीं हुआ, जबकि रिपोर्टों में इसे 'पूर्ण' दर्शाया गया। दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में समयसीमा व्यावहारिक नहीं है।"डिजिटल प्रक्रिया से वंचित समूहों पर प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़ ने कहा, "ओटीपी और ऑनलाइन फॉर्म जैसी व्यवस्थाओं ने ग्रामीण, वृद्ध और गरीब मतदाताओं को पीछे छोड़ दिया है। आधार को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।"आप ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं: वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को रोका जाए, बिना कारण हटाए गए सभी नाम तुरंत बहाल किए जाएं, एक स्वतंत्र जांच हो और दावा-आपत्ति की समयसीमा यथार्थवादी ढंग से बढ़ाई जाए।

पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि निर्वाचन आयोग ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो वह इस मुद्दे को "सड़क से सदन तक" उठाएगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को होना प्रस्तावित है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित