रायपुर , जनवरी 04 -- प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत स्थापित किए जा रहे सोलर रूफटॉप संयंत्रों के रख-रखाव को लेकर फैल रही भ्रांतियों को छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने रविवार को निराधार बताया है।

कंपनी के विशेषज्ञों के अनुसार, तीन किलोवॉट तक के सोलर रूफटॉप संयंत्रों में बैटरी की आवश्यकता ही नहीं होती, जिससे रख-रखाव का खर्च नगण्य हो जाता है।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि तीन किलोवॉट तक की क्षमता वाले संयंत्रों में ऑन-ग्रिड सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें सीधे ग्रिड से कनेक्शन होता है और बैटरी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे संयंत्रों से उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली मिल रही है, जिससे हजारों उपभोक्ता अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुए हैं।

कुछ माध्यमों में यह भ्रामक प्रचार किया जा रहा है कि सोलर रूफटॉप संयंत्र के रख-रखाव में बिजली बिल से अधिक खर्च आता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी तथा मात्र छह प्रतिशत ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा के कारण रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाना अब पहले से कहीं अधिक किफायती हो गया है।

जहां तक तीन किलोवॉट से अधिक क्षमता वाले संयंत्रों का प्रश्न है, वहां उपभोक्ताओं को बैटरी विकल्प के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में प्रयुक्त आधुनिक लिथियम-आयन बैटरियां अत्याधुनिक तकनीक से युक्त हैं, जिनका चार्जिंग-डिस्चार्जिंग चक्र लगभग 6,000 तक का है। कंपनियों द्वारा इन बैटरियों पर पांच से 10 वर्षों तक की लंबी वारंटी भी दी जा रही है।

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने वाले वेंडर्स को 5 वर्षों तक वार्षिक रख-रखाव सेवा प्रदान करना अनिवार्य है। इस अवधि में उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त रख-रखाव खर्च नहीं आता।

सोलर पैनलों की सफाई को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार धूल जमने से उत्पादन में होने वाली मामूली कमी को सामान्य पानी से सफाई कर आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष तकनीक या भारी खर्च की आवश्यकता नहीं होती।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना 13 फरवरी 2024 से नवीनतम एवं कड़े तकनीकी मानकों के साथ लागू की गई है। वर्ष 2019 के पुराने उदाहरणों के आधार पर वर्तमान योजना की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाना भ्रामक और अनुचित है।

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