रायपुर , जनवरी 03 -- छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (सीएएफ) की वर्ष 2018 की भर्ती प्रक्रिया में चयनित प्रतीक्षा सूची के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने शनिवार को उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव किया।

लगभग 417 अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे है जबकि विभाग में तीन हजार से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं। पिछले 13 दिनों से 100 से अधिक उम्मीदवार अपने परिजनों के साथ रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान एक अभ्यर्थी के छह माह के बच्चे की तबीयत बिगड़ने की घटना ने आंदोलन की गंभीरता को और उजागर कर दिया।

अभ्यर्थियों की मांगों पर मंत्री शर्मा ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद इस विषय पर चर्चा कर प्रतिनिधि मंडल को बुलाया जाएगा और समाधान की दिशा में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने तब तक धरना समाप्त करने की अपील भी की।

अभ्यर्थियों के अनुसार, वे अपनी स्थिति से अवगत कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिनों पूर्व मीडिया से बातचीत में अभ्यर्थियों ने यहां तक कह कि अगर वे मुख्यधारा से भटक गए होते, तो शायद उन्हें पुनर्वास एवं रोजगार मिल जाता।

आज विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गृह मंत्री के निवास पहुंचे। मंत्री ने उनसे पुलिस मुख्यालय से संबंधित नोटशीट लाने को कहा और हस्ताक्षर करने की बात कही लेकिन उसके बाद वे दौरे पर निकल गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि आजीविका चलाने के लिए उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ रही है और परिवार का भरण-पोषण कठिन हो गया है। एक अभ्यर्थी के बुजुर्ग पिता को गृह मंत्री निवास के बाहर हाथ जोड़कर मीडिया से मदद की गुहार लगाते देखा गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में जब सीएएफ की भर्ती निकली थी तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। मेरिट सूची में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई जबकि प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों को पद रिक्त न होने का हवाला देकर प्रतीक्षा में रखा गया। बाद में मेरिट सूची के कई उम्मीदवार मेडिकल परीक्षण में असफल हुए या नौकरी छोड़ गए जिससे पद खाली हुए लेकिन इस बीच सरकार बदल गई।

कांग्रेस शासनकाल में प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। समय बीतने के साथ स्थिति और गंभीर हो गई। लगभग 50 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी अब आयु सीमा पार कर चुके हैं और अन्य भर्तियों के लिए अयोग्य हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, पिछले छह वर्षों से सीएएफ में कोई नई भर्ती नहीं हुई है जबकि इस अवधि में कई पद रिक्त हो चुके हैं। नियमों के तहत नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने तक प्रतीक्षा सूची को वैध माना जाता है और शासन चाहे तो इन्हीं अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर सकता है।

सीएएफ की प्रतीक्षा सूची वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर शासन समय रहते निर्णय ले तो न केवल वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे युवाओं को न्याय मिल सकता है बल्कि पुलिस बल की गंभीर कमी को भी बहुत हद तक दूर किया जा सकता है।

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